भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 390, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस पर भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने निम्नलिखित पत्र में अपने विचार प्रकट
किये। – स.
कमिश्नर,
विशेष ट्रिब्यूनल
लाहौर षड्यन्त्र केस, लाहौर
श्रीमान जी,
जबकि ट्रिब्यूनल के दो न्यायाधीशों को हटा दिया गया है या वे हट गये
हैं और दो नये न्यायाधीश उनके स्थान पर नियुक्त कर दिये गये हैं, इसलिए
हम अपना स्पष्टीकरण दर्ज कराना आवश्यक समझते हैं, ताकि हम अपना पक्ष
स्पष्ट कर सकें और किसी भी प्रकार की शंकाएँ पैदा होने से बचा जा सके।
12 मई, 1930 को न्यायाधीश कोल्डस्ट्रीम ने जोकि अध्यक्ष भी हैं, एक
अदालती आदेश पास किया जिसके अन्तर्गत हमें अदालत में हथकड़ियाँ पहनाने
का आदेश दिया गया। इस आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस को
बल-प्रयोग करने के लिए भी कहा गया।
इस अचानक और असाधारण आदेश का कारण जानने के लिए हमने इस
अदालत से निवेदन किया था, जिसे सुनने की आवश्यकता महसूस नहीं की
गयी। ऐसी स्थितियों में पुलिस हमें ज़बरन हथकड़ियाँ लगाकर वापिस जेल ले
आयी। अगले दिन तीन में से एक न्यायाधीश आगा़ हैदर ने अध्यक्ष के इस
आदेश से अपने को अलग कर लिया। उस दिन से हम न्यायालय में नहीं जा
रहे।
जिन शर्तों पर हम न्यायालय में आने को तैयार हैं, वे अगले दिन न्यायालय
के समक्ष रखी गयी थीं। शर्तें थीं कि या तो अध्यक्ष क्षमा माँगें या फिर उन्हें
बदल दिया जाये। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि उनकी जगह पर ऐसे
एक न्यायाधीश को बैठा दिया जाये जो उस आदेश में भागीदार था।
पाँच हफ़्ते तक तो अपराधियों की शिकायत को विचार-योग्य ही नहीं
समझा गया।
वर्तमान ट्रिब्यूनल के निर्माण में दोनों अध्यक्ष और दूसरे न्यायाधीश – जो
उनके साथ सहमत नहीं हुए थे – को बदलकर दो नये न्यायाधीश लगाये गये
हैं। इस तरह एक न्यायाधीश को जो उस आदेश में भागीदार था, क्योंकि
आदेश बहुमत के आधार पर दिया गया था, ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष बनाया गया
है। ऐसी स्थिति में हम पुरज़ोर यह कहना चाहते हैं कि न्यायाधीश कोल्डस्ट्रीम
से व्यक्तिगत स्तर पर हमारा कोई शिकवा नहीं था और न ही शिकायत थी।
384 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़