भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 388, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंफ़्रांस के उच्च न्यायाधीश का यह कहना उचित है कि क़ानून की आन्तरिक
भावना स्वतन्त्रता समाप्त करना या प्रतिबन्ध लगाना नहीं, वरन स्वतन्त्रता को सुरक्षित
रखना और उसे आगे बढ़ाना है। सरकार को क़ानूनी शक्ति बनाये गये उन उचित
क़ानूनों से मिलेगी जो केवल सामूहिक हितों के लिए बनाये गये हैं, और जो जनता
की इच्छाओं पर आधारित हों, जिनके लिए यह बनाये गये हैं। इससे विधायकों समेत
कोई भी बाहर नहीं हो सकता।
क़ानून की पवित्रता तभी तक रखी जा सकती है जब तक वह जनता के दिल
यानी भावनाओं को प्रकट करता है। जब यह शोषणकारी समूह के हाथों में एक
पुर्ज़ा बन जाता है तब अपनी पवित्रता और महत्त्व खो बैठता है। न्याय प्रदान करने
के लिए मूल बात यह है कि हर तरह के लाभ या हित का ख़ात्मा होना चाहिए।
ज्यों ही क़ानून सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करना बन्द कर देता है त्यों ही
ज़ुल्म और अन्याय को बढ़ाने का हथियार बन जाता है। ऐसे क़ानूनों को जारी रखना
सामूहिक हितों पर विशेष हितों की दम्भपूर्ण ज़बरदस्ती के सिवाय कुछ नहीं है।
वर्तमान सरकार के क़ानून विदेशी शासन के हितों के लिए चलते हैं और हम
लोगों के हितों के विपरीत हैं। इसलिए इनकी हमारे ऊपर किसी भी प्रकार की
सदाचारिता लागू नहीं होती।
अतः हर भारतीय की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि इन क़ानूनों को चुनौती दे
और इनका उल्लंघन करे। अंग्रेज़ न्यायालय, जो शोषण के पुर्जे हैं, न्याय नहीं दे
सकते। विशेषकर राजनीतिक क्षेत्रों में, जहाँ सरकार और लोगों के हितों का टकराव
है। हम जानते हैं कि ये न्यायालय सिवाय न्याय के ढकोसले के और कुछ नहीं
हैं।
इन्हीं कारणों से हम इसमें भागीदारी करने से इन्कार करते हैं और इस मुक़दमे
की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे।
5-5-30
जज ने नोट किया – यह रिकॉर्ड में तो रखा जाये लेकिन इसकी कॉपी न दी
जाये, क्योंकि इसमें कुछ अनचाही बातें लिखी हैं।
382 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़