भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 363, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस स्पष्ट और महत्त्वपूर्ण आश्वासन पर ही, पूरे नौ घण्टे की बहस के बाद,
हमने भूख हड़ताल स्थगित करना स्वीकार किया था।
इसके अतिरिक्त, आपने हमें विश्वास दिलाया था कि हमारी दृढ़ इच्छा के
अनुसार साथी यतीन्द्रनाथ दास को, उनके स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति को देखते
हुए रिहा कर दिया जायेगा।
दूसरे यह कि विचाराधीन कैदियों के रूप में हमारी माँगें, जिनमें सबसे
महत्त्वपूर्ण हम सभी को (समेत साथी भगतसिंह और साथी दत्त) एक साथ आम
बैरक में रखने की माँग, सरकार एक या दो दिन में ही मान लेगी।
पर हमारी आशंकाएँ सही सिद्ध हुईं, जब उपसमिति की तगड़ी व एकमत
सिफ़ारिशों के बावजूद सरकार ने न तो साथी दास को रिहा करना स्वीकार किया
और न ही साथी भगतसिंह और साथी दत्त को हमारे साथ रखना।
अतः इस तथ्य के तत्काल प्रमाण मिल गये हैं कि सरकार को आपकी
सिफ़ारिशों की कोई परवाह नहीं और हमें उम्मीद है, आप हमें यह कहने के लिए
क्षमा करेंगे कि सरकार यही चाहती थी कि हमारी भूख हड़ताल तुड़वाने के लिए
जन-नेता होने के आपके सम्माननीय पद का इस्तेमाल करे। हम और भी बता दें
कि भूख हड़ताल स्थगित करने से पहले हमने बहुत ध्यान से इस बात पर विचार
किया था कि जाँच समिति के वायदे पर कहाँ तक भरोसा किया जा सकता है?
इस सम्बन्ध में साथी भगतसिंह और साथी दत्त की सलाह थी कि वर्तमान अवसर
पर इसकी परीक्षा हो जायेगी। अब हम देख रहे हैं कि सरकार ने, जबकि आपकी
दो बहुत साधारण सिफ़ारिशों की ओर भी ध्यान नहीं दिया, हमें तुरन्त भूख हड़ताल
आरम्भ करने के लिए विवश किया है।
(3) साथी दास की अवस्था बेहद चिन्ताजनक है और यदि सरकार यह
सोचती है कि उनके देहान्त के बाद हम अपने कर्त्तव्य से पीछे हट जायेंगे तो यह
उसकी घातक ग़लती है। हम सभी यह बता रहे हैं कि हम सब उन्हीं के रास्ते पर
चलने के लिए तैयार हैं। फिर भी निरन्तर संघर्ष को ध्यान में रखते हुए सुविधा के
लिए हम स्वयं को दो गुटों में बाँट रहे हैं, जिनमें से पहला गुट फ़ौरन भूख हड़ताल
शुरू कर रहा है।
यह निश्चय किया गया है कि जब पहले गुट के सदस्य का देहान्त हो जाये
तो दूसरे गुट में से एक सदस्य आगे आयेगा।
हमने यह निर्णय इसकी पूरी गम्भीरता को देखते हुए लिया है। अपने साथी
दास के पद-चिह्नों पर चलने के सिवाय हमारे समक्ष और कोई भी सम्मानजनक
व सरल रास्ता नहीं बचा है।
हम अपने कॉज़ (Cause) को वाजिब व बाइज़्ज़त समझते हैं, जिन्हें ऐसे गम्भीर
क़दम उठाने पर मजबूर करने की बजाय कोई भी सरकार मान लेती। हम फिर बता
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 357