भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 358, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंयतीन्द्रनाथ दास का पत्र
3 जुलाई, 1929
सम्राट बनाम यतीन्द्रनाथ दास
महोदय,
आपका प्रार्थी अत्यन्त सम्मानपूर्वक प्रार्थना करता है कि –
(क) क़रीब चार या पाँच दिन पहले रेलवे स्टेशन पुलिस लॉकअप, जहाँ मैं
बन्दी रखा गया था, में शिनाख़्ती परेड करवायी गयी।
(ख) कि रेलवे स्टेशन से गन्दे कपड़े पहने व क़रीब तीस-पैंतालीस साल
की उम्र के बीच के कुछ पंजाबी भंगियों और कुलियों को लाया गया। इन व्यक्तियों
को इस लॉकअप पर एक गली से लाया गया, जिसके क़रीब मजिस्ट्रेट की कार
में पहचान कराने वाला बैठा हुआ था। जब मुझे इन छह व्यक्तियों के बीच खड़ा
कर दिया गया और यद्यपि ऐसी शिनाख़्ती परेड के बेतुकेपन के विषय में मैंने
मजिस्ट्रेट से रोष भी प्रकट किया, क्योंकि ये पंजाबी न सिर्फ़ अत्यन्त हृष्ट-पुष्ट
थे उनके चेहरे के रूप तक से कोई भी यह बता सकता था कि वे बंगाली नहीं
हैं। लेकिन मेरी आपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, हालाँकि मैंने मजिस्ट्रेट
से बार-बार यह कहा कि न्यायोचित यह होगा कि मुझे मुझसे मिलते-जुलते
बंगालियों के बीच खड़ा किया जाये, क्योंकि पुलिस के पास मेरा फ़ोटो, मेरे
हस्ताक्षर आदि थे जिन्हें वे मेरी शिनाख़्त करने आने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों को
दिखा सकते थे।
(ग) कि जो व्यक्ति मेरी शिनाख़्त करने आया उससे, मैं जिस तारीख़ को
उसने कथित रूप से मुझे देखा, उस बारे में कुछ सवाल पूछना चाहता था लेकिन
न सिर्फ़ मेरा अनुरोध नहीं माना गया, वहाँ आये पुलिस-अधिकारियों द्वारा शिनाख़्त
करने आये, उस व्यक्ति को वहाँ से घसीटकर दूर ले जाया गया।
(घ) कि यह कार्रवाई बड़े गोपनीय तरीक़े व जल्दबाज़ी से की गयी और मुझे
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