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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 788 में से

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इंस्पेक्टर जनरल के नाम पत्र

12 जून, 1929 को असेम्बली बमकाण्ड के मुक़दमे का ड्रामा ख़त्म हुआ।
भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को उम्रक़ैद की सज़ा दी गयी। भगतसिंह को दिल्ली
से पंजाब ले जाकर मियाँवाली जेल में व दत्त को लाहौर केन्द्रीय जेल में रखा गया।
उन्होंने जेल में राजनीतिक बन्दियों के साथ व्यवहार के लिए संघर्ष की योजना गाड़ी
में ही बना डाली। उनके अनुसार, “सज़ा पाने के बाद हमने देखा कि हमारे वर्ग के
राजनीतिक क़ैदियों की स्थिति बहुत ख़राब थी।” 17 जून, 1929 को भगतसिंह और
बटुकेश्वर दत्त ने अलग-अलग नोटिसों में 15 जून से भूख हड़ताल शुरू करने की
सूचना और अपनी माँगों की सूची सरकार को पेश की। बाद में, 14 सितम्बर, 1929
को ये दोनों नोटिस पं. मदनमोहन मालवीय द्वारा लेजिस्लेटिव असेम्बली में पढ़े गये।
एक दूसरे पत्र में भगतसिंह ने स्वयं को लाहौर जेल भेजने की बात उठायी ताकि
साथियों के सम्पर्क में रह सकें।
मियाँवाली जेल
17 जून, 1929
सेवा में,
इंस्पेक्टर जनरल, जेल,
पंजाब (जेल्स) लाहौर।
प्रिय महोदय,
इस सच्चाई के बावजूद कि साण्डर्स शूटिंग केस में गिरफ़्तार दूसरे नौजवानों के
साथ ही मुझ पर भी मुक़दमा चलेगा, मुझे दिल्ली से मियाँवाली जेल में बदल दिया
गया है। उस केस की सुनवाई 26 जून, 1929 से शुरू होने वाली है। मैं यह समझने
में सर्वथा असमर्थ रहा हूँ कि मुझे यहाँ तब्दील करने के पीछे क्या भावना काम
कर रही है।
जो भी हो, न्याय की माँग है कि हरेक अभियुक्त (अण्डर ट्रायल) को वे सब
सुविधाएँ मिलनी चाहिए, जिनसे वह अपने मुक़दमे की तैयारी कर सके और लड़
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 347