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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 350, कुल 788 में से

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पृष्ठ 350

सत्ताधारी शक्तियाँ ठीक समय पर सही कार्रवाइयाँ करतीं, तो फ्रांस और रूस की
खूनी क्रान्तियाँ न बरस पड़तीं। दुनिया की कई बड़ी-बड़ी हुकूमतें विचारों के तूफ़ान
को रोकते हुए खून-ख़राबे के वातावरण में डूब गयीं। सत्ताधारी लोग परिस्थितियों
के प्रवाह को बदल सकते हैं। हम पहली चेतावनी देना चाहते थे और यदि हम कुछ
व्यक्तियों की हत्या करने के इच्छुक होते, तो हम अपने मुख्य उद्देश्य में असफल
हो जाते। माई लॉर्ड, इस नीयत (भावना) और उद्देश्य को दृष्टि में रखते हुए हमने
कार्रवाई की और इस कार्रवाई के परिणाम हमारे बयान का समर्थन करते हैं। एक
और नुक़्ता स्पष्ट करना आवश्यक है। यदि हमें बमों की ताक़त के सम्बन्ध में क़तई
ज्ञान न होता, तो हम पं. मोतीलाल नेहरू, श्री केलकर, श्री जयकर और श्री जिन्ना
जैसे सम्माननीय राष्ट्रीय व्यक्तियों की उपस्थिति में क्यों बम फेंकते? हम नेताओं
के जीवन किस तरह ख़तरे में डाल सकते थे? हम पागल तो नहीं हैं? और अगर
पागल होते तो जेल में बन्द करने के बजाय हमें पागलखाने में बन्द किया जाता।
बमों के सम्बन्ध में हमें निश्चित जानकारी थी। उसी के कारण हमने ऐसा साहस
किया। जिन बेंचों पर लोग बैठे थे, उन पर बम फेंकना कहीं आसान काम था,
लेकिन खाली जगह पर बमों का फेंकना निहायत मुश्किल काम था। अगर बम
फेंकने वाले सही दिमागों के न होते या वे परेशान (असन्तुलित) होते तो बम खाली
जगह की बजाय बेंचों पर गिरते। तो मैं कहूँगा कि खाली जगह के चुनाव के लिए
जो हिम्मत हमने दिखायी, उसके लिए हमें इनाम मिलना चाहिए। इन हालात में,
माई लॉर्ड, हम सोचते हैं कि हमें ठीक तरह समझा नहीं गया। आपकी सेवा में हम
सज़ाओं में कमी कराने नहीं आये, बल्कि अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आये
हैं। हम चाहते हैं कि न तो हमसे अनुचित व्यवहार किया जाये, न ही हमारे सम्बन्ध
में अनुचित राय दी जाये। सज़ा का सवाल हमारे लिए गौण है।
(जनवरी, 1930)
(लाहौर हाईकोर्ट के जस्टिस एस. फ़ोर्ड ने फ़ैसले में लिखा : “यह बयान कोई
ग़लती न होगी कि ये लोग दिल की गहराई और पूरे आवेग के साथ वर्तमान समाज
के ढाँचे को बदलने की इच्छा से प्रेरित थे। भगतसिंह एक ईमानदार और सच्चे
क्रान्तिकारी हैं। मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि वे इस स्वप्न को लेकर
पूरी सच्चाई से खड़े हैं कि दुनिया का सुधार वर्तमान सामाजिक ढाँचे को तोड़कर
ही हो सकता है। वे क़ानून के ढाँचे की जगह मनुष्य की स्वतन्त्र इच्छा को स्थापित
करना चाहते हैं। अराजकतावादियों की सदा यही मान्यता रही है, परन्तु जो अपराध
इनके और इनके साथी पर लगा है, उसकी यह कोई सफ़ाई नहीं है।” - स.)
344 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़