भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 346, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंबमकाण्ड पर हाईकोर्ट में बयान
दिल्ली के सेशन जज ने असेम्बली बम केस में भगतसिंह को आजीवन
कारावास का दण्ड दिया था। लाहौर हाईकोर्ट में उसकी अपील की गयी। दिल्ली
अदालत के निर्णय की आलोचना करते हुए भगतसिंह ने हाईकोर्ट में यह दूसरा बयान
दिया।
हमारे उद्देश्य पर ध्यान दें
माई लॉर्ड,
हम न वकील हैं, न अंग्रेज़ी विशेषज्ञ हैं और न हमारे पास डिग्रियाँ ही हैं,
इसलिए हमसे शानदार भाषणों की आशा न की जाये। हमारी प्रार्थना है कि हमारे
बयान की भाषा-सम्बन्धी त्रुटियों पर ध्यान न देते हुए, उसके वास्तविक अर्थ को
समझने का प्रयत्न किया जाये। दूसरे तमाम नुक्तों को अपने वकीलों पर छोड़ते
हुए मैं स्वयं एक मुद्दे पर अपने विचार प्रकट करूँगा। यह मुद्दा इस मुक़दमे में
बहुत महत्त्वपूर्ण है। मुद्दा यह है कि हमारी नीयत क्या थी और हम किस हद तक
अपराधी हैं।
यह बड़ा पेचीदा मामला है, इसलिए कोई व्यक्ति भी आपकी सेवा में
विचारों के विकास की वह ऊँचाई प्रस्तुत नहीं कर सकता, जिसके प्रभाव में हम
एक ख़ास ढंग से सोचने और व्यवहार करने लगे थे। हम चाहते हैं कि इसे दृष्टि
में रखते हुए ही हमारी नीयत और अपराध का अनुमान लगाया जाये। प्रसिद्ध
क़ानून-विशारद सालोमन के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके अपराधी
आचरण के लिए उस समय तक सज़ा नहीं मिलनी चाहिए, जब तक उसका
उद्देश्य क़ानून-विरोधी सिद्ध न हो।
सेशन जज की अदालत में हमने जो लिखित बयान दिया था, वह हमारे
उद्देश्य की व्याख्या भी करता है और उस रूप में हमारी नीयत की व्याख्या करता
था, लेकिन सेशन जज महोदय ने क़लम की एक ही नोक से यह कहकर कि
“आमतौर पर अपराध को व्यवहार में लाने वाली बात क़ानून के कार्य को प्रभावित
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