भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 342, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै। और उस आने वाले रक्तपात को हम ही नहीं, लाखों आदमी पहले से ही देख
रहे हैं।
काल्पनिक अहिंसा
ऊपर हमने 'काल्पनिक अहिंसा' शब्द का प्रयोग किया है। यहाँ पर उसकी व्याख्या
कर देना भी आवश्यक है। आक्रामक उद्देश्य से जब बल का प्रयोग होता है उसे
हिंसा कहते हैं, और नैतिक दृष्टिकोण से उसे उचित नहीं कहा जा सकता। लेकिन
जब उसका उपयोग किसी वैध आदर्श के लिए किया जाता है तो उसका नैतिक
औचित्य भी होता है। किसी हालत में बल-प्रयोग नहीं होना चाहिए, यह विचार
काल्पनिक और अव्यावहारिक है। इधर देश में जो नया आन्दोलन तेज़ी के साथ
उठ रहा है, और जिसकी पूर्व सूचना हम दे चुके हैं वह गुरु गोविन्द सिंह, शिवाजी,
कमाल पाशा, रिज़ा खाँ, वाशिंगटन, गैरीबाल्डी, लफ़ायत और लेनिन के आदर्शों से
ही प्रस्फुरित है और उन्हीं के पद-चिह्नों पर चल रहा है। चूँकि भारत की विदेशी
सरकार तथा हमारे राष्ट्रीय नेतागण दोनों ही इस आन्दोलन की ओर से उदासीन
लगते हैं और जानबूझकर उसकी पुकार की ओर से अपने कान बन्द करने का
प्रयत्न कर रहे हैं, अतः हमने अपना कर्त्तव्य समझा कि हम एक ऐसी चेतावनी दें
जिसकी अवहेलना न की जा सके।
हमारा अभिप्राय
अभी तक हमने इस घटना के मूल उद्देश्य पर ही प्रकाश डाला है। अब हम अपना
अभिप्राय भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं।
यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि इस घटना के सिलसिले में मामूली
चोटें खाने वाले व्यक्तियों अथवा असेम्बली के किसी अन्य व्यक्ति के प्रति हमारे
दिलों में कोई वैयक्तिक विद्वेष की भावना नहीं थी। इसके विपरीत हम एक बार
फिर स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम मानव-जीवन को अत्यन्त पवित्र मानते हैं
और किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने के बजाय हम मानवजाति की सेवा में
हँसते-हँसते अपने प्राण विसर्जित कर देंगे। हम साम्राज्यवाद की सेना के भाड़े के
सैनिकों जैसे नहीं हैं जिनका काम ही हत्या होता है। हम मानव-जीवन का आदर
करते हैं और बराबर उसकी रक्षा का प्रयत्न करते हैं। इसके बाद भी हम स्वीकार
करते हैं कि हमने जान-बूझकर असेम्बली भवन में बम फेंके।
घटनाएँ स्वयं हमारे अभिप्राय पर प्रकाश डालती हैं। और हमारे इरादों की परख
हमारे काम के परिणाम के आधार पर होनी चाहिए न कि अटकल एवं मनगढ़न्त
परिस्थितियों के आधार पर। सरकारी विशेषज्ञ की गवाही के विरुद्ध हमें यह कहना
है कि असेम्बली भवन में फेंके गये बमों से वहाँ की एक ख़ाली बेंच को ही कुछ
336 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़