भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 332, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै, उनका (नौजवानों) ख़ून जम नहीं गया, वे अपने राष्ट्र के सम्मान के लिए प्राणों
की बाज़ी लगा सकते हैं। और यह प्रमाण देश के उन युवकों ने दिया है जिनकी
स्वयं देश के नेता निन्दा और अपमान करते हैं।
अत्याचार सरकार सावधान!
इस देश की दलित और पीड़ित जनता की भावनाओं को ठेस मत लगाओ!
अपनी शैतानी हरकतें बन्द करो। हमें हथियार न रखने देने के लिए बनाये तुम्हारे
सब क़ानूनों और चौकसी के बावजूद पिस्तौल और रिवाल्वर इस देश की जनता
के हाथ में आते ही रहेंगे। यदि वह हथियार सशस्त्र क्रान्ति के लिए पर्याप्त न भी
हुए तो भी राष्ट्रीय अपमान का बदला लेते रहने के लिए तो काफ़ी रहेंगे ही।
हमारे अपने लोग हमारी निन्दा और अपमान करें। विदेशी सरकार चाहे हमारा
कितना भी दमन कर ले, परन्तु हम राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने और विदेशी
अत्याचारियों को सबक सिखाने के लिए सदा तत्पर रहेंगे। हम सब विरोध और
दमन के बावजूद क्रान्ति की पुकार को बुलन्द रखेंगे और फाँसी के तख़्तों पर से
भी पुकार कर कहेंगे –
इन्क़लाब ज़िन्दाबाद!
हमें एक आदमी की हत्या करने का खेद है। परन्तु यह आदमी उस निर्दयी,
नीच और अन्यायपूर्ण व्यवस्था का अंग था जिसे समाप्त कर देना आवश्यक है। इस
आदमी की हत्या हिन्दुस्तान में ब्रिटिश शासन के कारिन्दे के रूप में की गयी है।
यह सरकार संसार की सबसे अत्याचारी सरकार है।
मनुष्य का रक्त बहाने के लिए हमें खेद है। परन्तु क्रान्ति की वेदी पर
कभी-कभी रक्त बहाना अनिवार्य हो जाता है। हमारा उद्देश्य एक ऐसी क्रान्ति से
है जो मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण का अन्त कर देगी।
‘इन्क़लाब ज़िन्दाबाद!’
ह. बलराज
18 दिसम्बर, 1928 ‘सेनापति, पंजाब हि.स.प्र.स.’
326 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़