भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 225, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंज़ार मर गया। हज़ारों व्यक्तियों की गिरफ़्तारियाँ हुईं। अनेकों फाँसी चढ़ गये। पाँच
व्यक्तियों को विशेष रूप से जनता के समक्ष फाँसी दी गयी। इनमें सबसे अधिक
प्रसिद्ध एक महिला थी, जिसका नाम सोफिया प्रोवस्किया था।
उस समय पार्टी दब गयी। फिर कई अन्य पार्टियाँ उठीं। लेकिन नाशवादी पार्टी
का इतिहास इतना-सा है। नाशवादियों को लोगों ने ग़लत आँका और
अराजकतावादियों की तरह इन्हें भी बदनाम किया गया। एक अंग्रेज़ी समाचारपत्र ने
एक कार्टून बनाया जिसमें तबाह हुई चीज़ों में निहिलिस्ट बम और डाइनामाइट लिये
खड़े थे। एक पूछता है, “क्यों बन्धु, कुछ बाक़ी तो नहीं है?” दूसरा कहता है,
“दुनिया का गोला ही बाक़ी है।” पहला कहता है, “लगा देता हूँ डाइनामाइट तुम्हारे
उसमें भी!” यह बड़ा ग़लत बयान था। आस्कर वाइल्ड ने एक नाटक ‘वीरा दि
निहिलिस्ट’ लिखा था। उसमें नाशवादियों का अच्छा चित्र बनाने का प्रयास किया
गया। लेकिन उसमें बहुत अशुद्धियाँ हैं। एक अन्य किताब ‘कैरियर ऑफ़ ए
निहिलिस्ट’ भी प्रकाशित हुई थी। यह पठनीय है। इसमें नाशवादियों के बारे में ठीक
लिखा है। हिन्दी में ‘बोल्शेविक के कोम’ तथा ‘निहिलिस्ट-रहस्य’ प्रकाशित हो
चुके हैं। पहला काकोरी के शहीद श्री रामप्रसाद बिस्मिल का लिखा है। उसमें
उन्होंने निहिलिस्टों की बहुत दर्दनाक तस्वीर खींची है। मगर उन्हें मात्र विनाश चाहने
वाले ही दिखाया गया है, जोकि ठीक नहीं है। वे अच्छे जनसेवक थे। वे बहुत
बलिदानी और जनता से प्यार करने वाले थे। वे धन्य थे।
अन्यायी व्यवस्था
वे लोग जो महल बनाते और झोंपड़ियों में रहते हैं, वे लोग जो सुन्दर-सुन्दर
आरामदायक चीजें बनाते हैं, स्वयं पुरानी और गन्दी चटाइयों पर सोते हैं।
ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? ऐसी स्थितियाँ यदि भूतकाल में रही हैं तो
भविष्य में क्यों नहीं बदलाव आना चाहिए? यदि हम चाहते हैं कि देश की जनता
की हालत आज से अच्छी हो तो ये स्थितियाँ बदलनी होंगी। हमें परिवर्तनकारी
होना होगा।
अगस्त, 1928
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 219