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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 788 में से

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पृष्ठ 19

पहले संस्करण की भूमिका
भगतसिंह की वैचारिक विरासत
और हमारा समय
“भगतसिंह पर ही इतना ज़ोर क्यों?” – इतिहास के एक प्रतिष्ठित विद्वान ने पिछले
दिनों पूछा। उनका कहना था कि देश के हालात आज इतने बदल चुके हैं कि
भगतसिंह ने जो कुछ भी लिखा-सोचा और बयान दिया, वे आज हमारे लिए
मार्गदर्शक नहीं हो सकते। फिर क्या यह महज़ भावनाओं, भावुकता या उत्तेजना के
सहारे इतिहास-निर्माण का प्रयास नहीं है, क्या यह भी नायक-पूजा का एक
उपक्रम नहीं है?
प्रश्न को सिरे से ख़ारिज नहीं किया जा सकता था। अन्य प्रकाशनों और
क्रान्तिकारी राजनीतिक संगठनों को जाने दें, विगत एक दशक के दौरान भगतसिंह
और उनके साथियों के महत्त्वपूर्ण लेखों-वक्तव्यों-पत्रों को अलग-अलग, और
संकलनों के रूप में, हम लोग लगातार छापते रहे हैं और भगतसिंह की दुर्लभ जेल
नोटबुक को पहली बार हिन्दी में छापने और अब तक उसके कई संस्करण
निकालने का काम भी हम लोगों ने ही किया। और अब यह पुस्तक – ‘भगतसिंह
और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़’। कहीं उक्त प्रोफ़ेसर साहब
का प्रश्न सही तो नहीं था? हम समझते हैं, उसी प्रश्न के उत्तर में इस पुस्तक के
प्रकाशन का औचित्य-प्रतिपादन – इसके ऐतिहासिक महत्त्व और अनन्य उपयोगिता
का तर्क निहित है।
यह सही है कि भगतसिंह और उनके साथियों के (और निस्सन्देह उनमें
अग्रणी विचारक क्रान्तिकारी भगतसिंह ही थे) विचार-पक्ष के बारे में, देश के
शिक्षित लोगों और युवा पीढ़ी के बीच अपरिचय-अज्ञान की एकदम वैसी स्थिति
नहीं है जैसी आज से पच्चीस-तीस वर्षों पहले थी। भगतसिंह एक बेहद
प्रतिभाशाली और अध्ययनशील क्रान्तिकारी थे, यह जानकारी तो उन्हें भी थी जिन
लोगों ने ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ में भगतसिंह के साथ
काम कर चुके क्रान्तिकारी जितेन्द्रनाथ सान्याल की पुस्तक ‘भगतसिंह’ और शिव
भगतसिंह की वैचारिक विरासत और हमारा समय / 13

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