भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 103, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुवक ही तो होते हैं। एक पाश्चात्य पण्डित ने ठीक कहा है - It is an
established truism that youngmen of today are the Countrymen of
tomorrow holding in their hands the high destinies of the Land. They are
the seeds that spring and bear fruit. भावार्थ यह कि आज के युवक ही कल
के देश के भाग्य-निर्माता हैं। वे ही भविष्य के सफलता के बीज हैं।
संसार के इतिहासों के पन्ने खोलकर देख लो, युवक के रक्त से लिखे हुए
अमर सन्देश भरे पड़े हैं। संसार की क्रान्तियों और परिवर्तनों के वर्णन छाँट डालो,
उनमें केवल ऐसे युवक ही मिलेंगे, जिन्हें बुद्धिमानों ने 'पागल छोकड़े' अथवा
'पथ-भ्रष्ट' कहा है। पर जो सिड़ी हैं, वे क्या ख़ाक समझेंगे कि स्वदेशाभिमान से
उन्मत्त होकर अपनी लोथों से क़िले की खाइयों को पाट देने वाले जापानी युवक
किस फ़ौलाद के टुकड़े थे। सच्चा युवक तो बिना झिझक के मृत्यु का आलिंगन
करता है, चोखी संगीनों के सामने छाती खोलकर डट जाता है, तोप के मुँह पर
बैठकर भी मुस्कुराता ही रहता है, बेड़ियों की झनकार पर राष्ट्रीय गान गाता है और
फाँसी के तख्ते पर अट्टहासपूर्वक आरूढ़ हो जाता है। फाँसी के दिन युवक का
ही वज़न बढ़ता है, जेल की चक्की पर युवक ही उद्बोधन-मन्त्र गाता है,
कालकोठरी के अन्धकार में धँसकर ही वह स्वदेश को अन्धकार के बीच से
उबारता है। अमेरिका के युवक-दल के नेता 'पैट्रिक हेनरी' ने अपनी ओजस्विनी
वक्तृता में एक बार कहा था - Life is dearer outside the prisonwalls, but it
is immeasurably dearer within the prison-cells, where it is the price paid for
the freedom's fight. अर्थात जेल की दीवारों से बाहर की ज़िन्दगी बड़ी महँगी है,
पर जेल की काल-कोठरियों की ज़िन्दगी और भी महँगी है; क्योंकि वहाँ यह
स्वतन्त्रता-संग्राम के मूल्य-रूप में चुकायी जाती है।
जब ऐसा सजीव नेता है, तभी तो अमेरिका के युवकों में यह ज्वलन्त घोषणा
करने का साहस भी है कि, "We believe that when a Government becomes
a destructive of the natural right of man, it is the man's duty to destroy that
Government. अर्थात अमेरिका के युवक विश्वास करते हैं कि जन्मसिद्ध
अधिकारों को पद-दलित करने वाली सत्ता का विनाश करना मनुष्य का कर्तव्य
है।
ऐ भारतीय युवक! तू क्यों गफ़लत की नींद में पड़ा बेख़बर सो रहा है! उठ,
आँखें खोल, देख, प्राची-दिशा का ललाट सिन्दूर-रंजित हो उठा। अब अधिक मत
सो। सोना हो तो अनन्त निद्रा की गोद में जाकर सो रह। कापुरुषता के क्रोड़ में क्यों
सोता है? माया-मोह-ममता त्यागकर गरज उठ -
"Farewell Farewell My true Love
The army is on Move;
विचार-यात्रा का पहला पड़ाव / 97