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सर्वकोश
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 पृष्ठ

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साहिब बन्दगी

(37) साहिब जी को पानी में पारा मिलाकर पिलाना

हर पासे साहिब की जय-जयकार हो रही थी। साथ ही शेख तकी और पंडित, मौलवियों आदि की ईर्ष्या भी बढ़ती जा रही थी। उन्होंने साहिब को मारने के लिए फिर एक नयी योजना बनाई। उन्होंने शेख तकी को सलाह दी कि कबीर का अंत करने के लिए क्यों न उसे पानी में पारा डालकर पिला दिया जाए। पारा तो शरीर से फूट-फूटकर निकलता है और प्राण लेकर ही जाता है। शेख तकी को यह तरकीब बहुत पसंद आई। उसने किसी को भेजकर बाज़ार से पारा मँगवा लिया। फिर शेख तकी ने उसे पानी में इस तरह मिलाया कि पारे के होने का पता नहीं चलता था। पारा मिला पानी का गिलास लेकर शेख तकी साहिब के पास आया और वो पानी साहिब को पीने के लिए दिया। हाथ में गिलास पकड़ते ही वो जल भाप बनकर आकाश में उड़ गया। साहिब ने कहा कि यह गिलास तो खाली है। यह देख शेख तकी बड़ा लज्जित हुआ। साहिब तो अन्तर्यामी थे पर शेख तकी नहीं जानता था कि साहिब क्या चीज़ हैं। शेख तकी तो साहिब को साधारण मनुष्य समझने की भूल कर रहा था।

पंडित मुल्ला सब ने मिलके, नया प्रपंच रचाया।
खुश हुये सब पाखण्डी, पारे से कोई बच न पाया।।
पानी पारे से भरा गिलास, साहिब हाथ थमाया।
पारा पानी उड़ा भाप बन, जब साहिब को पकड़ाया।।