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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 367, कुल 774 में से

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पृष्ठ 367

(15).

Line 16:
"पत्यामृषभं लोकंपृणा॑ उदीचाच लोकंपृणया प्रसौत्य॑ग्नि-"

  • लोकंपृणा॑ : accent over णा
  • प्रसौत्य॑ग्नि- : accent over त्य

Line 17:
"मुदीचीभिः संप्रच्छादयन्ति॑ संप्रच्छन्नं पलाशशाखया परि-"

  • संप्रच्छादयन्ति॑ : accent over न्ति

Line 18:
"कर्षति लोकं पृण छिद्रं पृणेत्य॑थ चितिकृप्त्याभिमृशति चित्ति-"

  • पृणेत्य॑थ : accent over त्य

Now let's check the footnotes at the bottom:
Line 19:
"१ Thus (०पातिनीꣳ) MBU Bhav. (one MS.); पातीनीꣳ Be; "
Line 20:
"०पादिनीꣳ Tr H Bhav. (another MS.), Keś. (twice), Ms. (but Msc. :"
Line 21:
"हंसपतनवत् चक्रया गत्या आधायाः, and यथा भवेयुर्हंसपातिन्य इति गोपाळः) ।"

Wait, look at line 20:
"Keś. (twice), Ms. (but Msc. :"
Look at "चक्रया" or "वक्रया":
ह