सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 774 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 161

तौ यात्वाक्रम्याश्राव्याह देवान्यजेति ' वषट्कृते जुहुतो यज
यजेति नवानूयाजानिष्ट्वोदङ्ङावृत्याक्रम्य यथायतनग्ँ स्रुचः१
सादयित्वा वाजवतीभ्याग्ँ स्रुचौ१ व्यूहतः ' प्राञ्चा प्रस्तरपरिधी
संप्रकीर्य संप्रस्राव्य स्रुचौ२ विमुच्य ' तथैव कसौ वा चमसौ
वानाज्यलिप्तौ याचतः ' समानौ वाजिनयोर्य्याध्वर्युरेव ५
प्रदक्षिणमावृत्य प्रत्यङ्ङाद्रुत्य पत्नीः संयाज्य प्राङेत्य ध्रुवा-
माप्याय्य त्रीणि पाशुकम्बिकानि समिष्टयजूंषि जुहोत्येकं
प्रतिप्रस्थाता दार्शपौर्णमासिकं दक्षिणे ' ऽथ पूर्णपात्रविष्णुक्रमै-
श्चरित्वा न विसृजते व्रतमेव याचत्याज्यस्थालीग्ँ सस्रुवाग्ँ स्रुचं
बर्हिः प्रतिवसनीये वाससी वारुणे निष्कासं तुषानित्येतत्स- १०
मादायाहैहि यजमानेत्यन्वग्यजमान