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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 408 में से

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पृष्ठ 41

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आत्म-समर्पण योग
कलकत्ता के राजा बाज़ार मुहल्ले में एक छोटा-सा दोमंजिला खपरैल का
मकान था। ग़रीबों का-सा घर जँचता था। इसमें ट्राम-कंडक्टर या इसी श्रेणी
के लोग रहते थे। इसी मकान के ऊपरवाले एक कमरे में श्री शशांकमोहन हाजरा
नामक एक युवा पुरुष रहते थे। जिस समय वह गिरफ्तार किये गये उस
समय उनके कमरे में बम के ऊपरी खोल मिले और ऐसे लेख भी बरामद हुए
जिनमें योगाभ्यास की विधि थी। अदालत मे मुक़दमा चलते समय किसी ने भी
इन लेखो को महत्त्वपूर्ण नही समझा; कहा गया कि ये लेख असल मे लोगों को
फँसाने के लिए हैं। लोगों को गुमराह करने का यह एक जरिया है। लेकिन मै
जानता हूँ कि असल में बात ऐसी थी नही। हम लोगो ने सचमुच ही अपने
जीवन मे इस साधन (योगाभ्यास) को ग्रहण किया था। हम लोग सिर्फ मुंह से
ही न कहते थे कि भगवान् सभी कामो के नियन्ता हैं, बल्कि सचमुच हृदय से,
गम्भीर श्रद्धा के साथ, इस बात पर हम विश्वास भी करते थे। हम अपनी गरज
के लिए, अपना काम साधने के लिए ही कुछ भगवान् को न घसीटते थे, किन्तु
भगवान् के अधिनायकत्व की आलोचना और भावना में कितने ही दिन और
रात्रियां तक हमने बिताईं।
भारत की छाती पर जो यह महान् आन्दोलन हुआ और हो रहा है, यह
भगवान् की इच्छा से ही हुआ और हो रहा है; यही हम लोगों का विश्वास है।
जिस भाव की अव्यर्थ प्रेरणा से भारत के सैकड़ों नवयुवक मृत्यु को सहर्ष चुनौती
देकर बड़ी-बड़ी कठिन विपत्तियों के मुख मे भी बड़ी आन-बान के साथ कूदे थे,
और जिस प्रेरणा के बल से उन्होंने अपार दुःखों और लांछनों को पक्के संयमी की
भांति सहन किया था, उस भाव के प्लावन को क्या कोई विशेष व्यक्ति उपस्थित
कर सकता है ? या इसका स्थायित्व किसी व्यक्ति विशेष के मत, अथवा जीवन-
मरण पर अवलम्बित है ?
जब मैं निरा बच्चा ही था तभी से मेरे हृदय में स्वदेश का उद्धार करने का
संकल्प जाग्रत रहता था। यह संकल्प मुझे किसी से प्राप्त नहीं हुआ। उस छोटी-
सी ही उम्र में किसने मेरे रोम-रोम में इस संकल्प को भर दिया था ? बचपन से
ही मैं इस विषय की आलोचना अपने छोटे भाइयों से करता आया हूँ। उस समय