सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 235, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 235

चेम्सफोर्ड सुधार और असहयोग / 233
दल में आ पहुँचा । ऊपर कही शर्त के अनुसार मुझे भी रासबिहारी के अधीन
रहकर काम करना पड़ा ।
उस समय ढाका अनुशीलन समिति के सबसे बड़े-बड़े कार्यकर्त्ता थे :
श्री प्रतुलचन्द्र गंगोली, श्री त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती, श्री नरेन्द्रनाथ सेन, श्री रमेश-
चन्द्र आचार्य, श्री रमेशचन्द्र चौधरी और श्री नलिनीकिशोर गुह । इनमें से एक
नरेन्द्रसेन को छोड़कर और सबसे मैं खूब परिचित था ।
अण्डमन मे जाने के पहले गिरफ्तारी के दिन तक, मेरे साथ ढाका अनुशीलन
समिति का अच्छा सहयोग था । यह बात तो थी कि रासबिहारी के जापान चले
जाने के बाद ढाका अनुशीलन समिति के बचे-बचाए नेताओ ने अपनी सब बाते
मुझे बता दी थी । लेकिन उनके आचरण से मुझे यह अनुभव हो रहा था कि मुझे
पूर्ण रूप से अपनी सब बातें बताने मे ये धीरे-धीरे क्रमशः आगे बढ़ रहे थे । अतः
उत्तर भारत का दल और ढाका अनुशीलन समिति क्रमशः एक-दूसरे के साथ
अधिक-से-अधिक सहयोग करने के लिए आगे बढ़ रहे थे । ऐसी अवस्था मे ही मै
गिरफ्तार हो गया था । अब अण्डमन से लौटने के बाद ढाका समिति के नेताओ
के साथ भली प्रकार से विचार-विमर्श करने के पहले मैं कोई अलग कार्यक्रम
बनाना नही चाहता था ।
बनारस केस मे गिरफ्तार होने के बहुत पहले भी मैंने बहुत दफा बगाल के
विभिन्न क्रान्तिकारी दलों को मिलाने की बहुत चेष्टा की थी, लेकिन कृतकार्य
नही हुआ था । अब अण्डमन से लौटने के बाद भी मैंने फिर चाहा कि भारत के
समस्त क्रान्तिकारी दल एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली संगठन बनाएं ।
बेनियापुकुर के मकान मे रहते समय बगाल के विभिन्न क्रान्तिकारी नेताओ के
साथ मैं मिलता रहा । दूसरे दलो के प्रमुख नेताओ मे से मै जिन्हें अच्छी तरह से
जानता था, वे थे श्री जदुगोपाल मुकर्जी, श्री विपिनचन्द्र गगोली, श्री मनोरंजन
गुप्त, श्री अरुणचन्द्र गुह इत्यादि । उस समय एम० एन० राय नरेन्द्रनाथ
भट्टाचार्य के नाम से परिचित थे । ये सब उस समय बगाल के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी
श्री यतीन्द्रनाथ मुकर्जी के अधीन काम कर रहे थे । अण्डमन से छूटने के बाद मैं
इन सब परिचित नेताओ से मिला था ।
एक तरफ महात्मा गांधी अपने सत्याग्रह आन्दोलन के लिए तैयारी कर रहे
थे । दूसरी तरफ बगाल के क्रान्तिकारी नेतागण अपने लेख और पुस्तकादि द्वारा
क्रान्ति की भावना फैलाने का प्रयत्न कर रहे थे । श्री अरविन्द के बाद बंगाल मे
उल्लेख-योग्य नेता खुले आन्दोलन मे और कोई नही रह गए थे । सी० आर०
दास, विपिनचन्द्रपाल, व्योमकेश चक्रवर्ती और कुछ हद तक बी० सी० चटर्जी
और श्याम सुन्दर चटर्जी भी खुले आन्दोलन मे यथाशक्ति भाग ले रहे थे । उधर
महाराष्ट्र मे तिलक एवं पजाब मे लाला लाजपतराय जीवित थे । श्री मदनमोहन
मालवीय की गिनती नरम दल वालों में थी । 'पं० जवाहरलाल नेहरू क्रमशः खुले
आन्दोलन मे भाग लेने लगे थे । पुत्र के प्रभाव के कारण मोतीलाल नेहरू भी