बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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दल में आ पहुँचा । ऊपर कही शर्त के अनुसार मुझे भी रासबिहारी के अधीन
रहकर काम करना पड़ा ।
उस समय ढाका अनुशीलन समिति के सबसे बड़े-बड़े कार्यकर्त्ता थे :
श्री प्रतुलचन्द्र गंगोली, श्री त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती, श्री नरेन्द्रनाथ सेन, श्री रमेश-
चन्द्र आचार्य, श्री रमेशचन्द्र चौधरी और श्री नलिनीकिशोर गुह । इनमें से एक
नरेन्द्रसेन को छोड़कर और सबसे मैं खूब परिचित था ।
अण्डमन मे जाने के पहले गिरफ्तारी के दिन तक, मेरे साथ ढाका अनुशीलन
समिति का अच्छा सहयोग था । यह बात तो थी कि रासबिहारी के जापान चले
जाने के बाद ढाका अनुशीलन समिति के बचे-बचाए नेताओ ने अपनी सब बाते
मुझे बता दी थी । लेकिन उनके आचरण से मुझे यह अनुभव हो रहा था कि मुझे
पूर्ण रूप से अपनी सब बातें बताने मे ये धीरे-धीरे क्रमशः आगे बढ़ रहे थे । अतः
उत्तर भारत का दल और ढाका अनुशीलन समिति क्रमशः एक-दूसरे के साथ
अधिक-से-अधिक सहयोग करने के लिए आगे बढ़ रहे थे । ऐसी अवस्था मे ही मै
गिरफ्तार हो गया था । अब अण्डमन से लौटने के बाद ढाका समिति के नेताओ
के साथ भली प्रकार से विचार-विमर्श करने के पहले मैं कोई अलग कार्यक्रम
बनाना नही चाहता था ।
बनारस केस मे गिरफ्तार होने के बहुत पहले भी मैंने बहुत दफा बगाल के
विभिन्न क्रान्तिकारी दलों को मिलाने की बहुत चेष्टा की थी, लेकिन कृतकार्य
नही हुआ था । अब अण्डमन से लौटने के बाद भी मैंने फिर चाहा कि भारत के
समस्त क्रान्तिकारी दल एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली संगठन बनाएं ।
बेनियापुकुर के मकान मे रहते समय बगाल के विभिन्न क्रान्तिकारी नेताओ के
साथ मैं मिलता रहा । दूसरे दलो के प्रमुख नेताओ मे से मै जिन्हें अच्छी तरह से
जानता था, वे थे श्री जदुगोपाल मुकर्जी, श्री विपिनचन्द्र गगोली, श्री मनोरंजन
गुप्त, श्री अरुणचन्द्र गुह इत्यादि । उस समय एम० एन० राय नरेन्द्रनाथ
भट्टाचार्य के नाम से परिचित थे । ये सब उस समय बगाल के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी
श्री यतीन्द्रनाथ मुकर्जी के अधीन काम कर रहे थे । अण्डमन से छूटने के बाद मैं
इन सब परिचित नेताओ से मिला था ।
एक तरफ महात्मा गांधी अपने सत्याग्रह आन्दोलन के लिए तैयारी कर रहे
थे । दूसरी तरफ बगाल के क्रान्तिकारी नेतागण अपने लेख और पुस्तकादि द्वारा
क्रान्ति की भावना फैलाने का प्रयत्न कर रहे थे । श्री अरविन्द के बाद बंगाल मे
उल्लेख-योग्य नेता खुले आन्दोलन मे और कोई नही रह गए थे । सी० आर०
दास, विपिनचन्द्रपाल, व्योमकेश चक्रवर्ती और कुछ हद तक बी० सी० चटर्जी
और श्याम सुन्दर चटर्जी भी खुले आन्दोलन मे यथाशक्ति भाग ले रहे थे । उधर
महाराष्ट्र मे तिलक एवं पजाब मे लाला लाजपतराय जीवित थे । श्री मदनमोहन
मालवीय की गिनती नरम दल वालों में थी । 'पं० जवाहरलाल नेहरू क्रमशः खुले
आन्दोलन मे भाग लेने लगे थे । पुत्र के प्रभाव के कारण मोतीलाल नेहरू भी