सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 188

186 / बन्दी जीवन
बनाना पड़ता।' उसी प्रकार जो विचारशील हैं, भावुक हैं, जो सचमुच ही
प्रतिभावान् थिंकर्स (विचारक) हैं वे पण्डित हुए बिना भी पोथी पढ़ने या परीक्षाएँ
पास करने में वैसी योग्यता दिखाए बिना भी संसार के अनेक अद्भुत विस्मय-
जनक रहस्यों की घोषणा कर सकते हैं।
विप्लवियों के कार्यकलाप को बहुत लोग पागलपन कहते हैं। वे कहते हैं,
दिमाग़ में कुछ खराबी हुए बिना कोई विप्लव दल में योग नहीं दे सकता।—
विप्लवियों के अन्दर सुनते हैं, सुबुद्धि का—अक्लमन्दी का विशेष अभाव है—
किन्तु रविबाबू ने कहा है,—'सुबुद्धि नाम का पदार्थ मर्त्यलोक में पाया जाता है,
किन्तु ऊँचे दर्जे का जो खालिस पागलपन है वह देवलोक की वस्तु है। इसी से
जान पड़ता है कि सुबुद्धि की गढ़ी हुई चीजें टूट-फूट पड़ती हैं। और पागलपन
जिन चीजों को उड़ाकर लाता है वे बीज की तरह जंगलों के जंगल उगा डालती
हैं।'