बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थ संस्करण की भूमिका
आज से 16 साल पहले 'बन्दी जीवन' का लिखना प्रारम्भ किया था ।
'बन्दी जीवन' के प्रथम संस्करण की भूमिका मे मैंने लिखा था 'मेरी अभी तक
यह धारणा है कि यह पुस्तक तीन खण्डों में समाप्त होगी, लेकिन कर्मक्षेत्र की
विषम उलझनों में पडकर मैं नहीं कह सकता कि इस पुस्तक का कितना अंश
लिख पाऊँगा । कारण आज तक जितने काम मैंने अपने हाथ मे लिए, किसी को
भी मैं निर्विघ्न रूप से पूर्ण नही कर पाया ।' ये वाक्य कलकत्ता में बैठे हुए 25
अगस्त, सन् '22 के दिन मैंने लिखे थे । अदृष्ट की क्या खूबी है कि इस पुस्तक के
दो भाग भी मैं यथार्थ रूप में लिख नही पाया था कि फिर जेल में घर घसीटा गया ।
अब 16 साल के बाद आज फिर इस पुस्तक के सम्पादन कार्य में हाथ लगाया है ।
मैं फरवरी, सन् '20 मे अण्डमन से लौटा । लौटकर माताजी एवं भाइयों के
अनुरोध से ईंटें बनवाने के काम मे फँस गया । किसी कारबार में फँसने से कितनी
उलझनो मे जान फँस जाती है उसको भुक्तभोगी ही जान सकता है । इसी उल-
झन मे पड़े हुए मैंने 'बन्दी जीवन' लिखना प्रारम्भ किया । इसके थोड़े ही दिन
बाद सन '21 के शुरू मे मैं जमशेदपूर में मजदूर संगठन के कार्य मे लग गया ।
मेरी इच्छा तो यह थी कि मैं 'बन्दी जीवन' को धीरे-धीरे लिखता जाऊँ लेकिन
मेरे एक मित्र श्री हेमन्तकुमार सरकार जबर्दस्ती मेरी हस्तलिखित पोथी को
प्रकाशनार्थ ले गये । उस समय हेमन्तकुमार देशबन्धु सी० आर० दास के विश्वस्त
अनुयायियो मे थे । सी० आर० दास के सम्पादकत्व में 'नारायण' नाम का एक
मासिक-पत्र निकलता था । हेमन्तकुमार इस मासिक-पत्र का संचालन-भार लिये
हुए थे । मुझे विश्वास नही था कि मेरा लेख प्रकाशित करने के योग्य है । हेमन्त-
कुमार ने मुझे आश्वासन दिया कि मेरा लेख काफी अच्छा है, और इसे वे 'नारायण'
में अवश्य प्रकाशित कराएँगे । इस प्रकार से जीवन में सर्वप्रथम मैंने लिखना
प्रारम्भ किया ।
लेकिन मैं अधिक नहीं लिख पाया था कि इसी बीच में मासिक-पत्र में मुझे
प्रति मास नियमित रूप से लेख देना पड़ा । इधर मजदूर संगठन के काम में तो
दिन-रात व्यस्त रहता ही था, इसलिए इस पुस्तक को वांछित रूप से तो नहीं ही
लिख पाया ।
आज जब पुनः इस पुस्तक का सम्पादन करने बैठा हूँ तो सहस्रों प्रकार की