बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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करनी पड़ती, यह तो उसका जन्मगत संस्कार होता है । इस साधारण जागृति
के सिवाय, तुर्की में मैडिकल मिशन भेजने के बाद भारत के मुसलमानों में भी
विप्लव का कार्य आरम्भ हो जाता है । रोलट रिपोर्ट में लिखा है कि अंग्रेजों के
तुर्की इटैलियन युद्ध के समय तुर्की को सहायता न देने के कारण भारतवर्ष के
मुसलमानों में असन्तोष का भाव फैल गया । पर हमारे विचार में यह बात गलत
है । अंग्रेज तुर्की की सहायता करते तो भी मुसलमानों में यह जागरण अवश्यं-
भावी था, क्योंकि असल बात तो यह थी कि बाहर के आघात से, बाहर के
संस्पर्श में आने से एक अपने को भूली हुई जाति जाग गई .? अंग्रेजों के साथ उस
जाति का क्या सम्बन्ध था, यह दूसरी बात है ।
जो हो, इस मैडिकल मिशन के अनेक युवक तुर्की के संस्पर्श में आने से
विप्लव धर्म में दीक्षित हो गए और भारत में आकर उन्होंने मुसलमान सम्प्रदाय
के बीच विप्लव का कार्य आरम्भ कर दिया । और तुर्की की गवर्नमेंट ने इन
मुसलमानो में से किसी-किसी को अथवा इनके पसन्द के व्यक्तियों को भारतवर्ष
में तुर्की राजदूत (Consul) नियुक्त कर दिया था । देश के जनसाधारण को
इन बातों का कुछ भी पता न मिल सका, किन्तु भारत सरकार इन सब बातों के
अलावा और भी बहुत कुछ जानती है ।
किन्तु मुसलमान विप्लव दल पहले से ही बाहर की मुसलमान शक्तियों की
ओर ही विशेष लक्ष्य रखता था । इनको सब आशा-प्रतीक्षा इसीलिए भारत के
बाहर ही केन्द्रित थी । मुसलमान विप्लव दल के जिन सज्जन के साथ दिल्ली में
मेरी बातचीत हुई थी उनके नजदीक सुना था कि इस विप्लव दल ने इसी बीच
काबुल से भारत पर आक्रमण करने के लिए अनेक बार अनुरोध किया था ।
मैंने उस दिन उनके इस कार्य का घोर प्रतिवाद किया था । उन्होंने मुझे यह
समझाने का यत्न किया कि बाहर की किसी राजशक्ति की सहायता के बिना
भारत की विप्लव चेष्टा सार्थक न होगी मैंने भी उन्हें यह समझाने की चेष्टा की
कि बाहर की सहायता चाहने का यह अर्थ न होना चाहिए कि बाहर की कोई
राजशक्ति आकर भारत में दखल कर ले । उन्होंने मुझे बड़े यत्न से यह समझाना
चाहा कि काबुल वाले भारत में आकर यहाँ स्थायी रूप से कभी न रहेंगे । हमें
स्वाधीन कराकर ही चले जाएंगे । भारत के बहुत-से मुसलमानों की ऐसी ही
धारणा है ।
किन्तु इन्हीं मुसलमान लोगों ने बीच-बीच में कई बार हमारी धन से सहायता
की थी । उनके साथ बातचीत करके जहाँ तक समझ सका हूँ उससे जान पड़ता
है कि मुसलमानों का यह विप्लव दल सारे देश में एक साथ ही कार्य करता था ।
उनका यह विप्लव दल पंजाब के सीमान्त प्रदेश से लेकर सुदूर ब्रह्म देश तक फैल
गया था । किन्तु हमारे बंगाल के विप्लव दल में दलबन्दी का अन्त न था । पर
सौभाग्य से बंगाल के बाहर उत्तर भारत में एकमात्र हमारा दल ही था, इसी से
इधर दलबन्दी का कोई विशेष अवकाश न था ।