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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 408 में से

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पृष्ठ 102

100 / बन्दी जीवन
प्रेरणा से जाग्रत होकर भारत के युवकों ने हथेली में जान लेकर यह खेल खेला
तथा यूरोपीय महायुद्ध छिड़ने से पहले भारत में विप्लव करने की इच्छा रखने
वाला दल इसके लिए कैसी तैयारी कर रहा था, और पंजाब में गदर का उद्योग
निष्फल हो जाने के पश्चात् भारत के इस विप्लवपन्थी दल का क्या स्वरूप
हो गया था, इन बातों पर इस पुस्तक के अगले भागों में विचार करने की
इच्छा है।