सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 530 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 8

शुभाशीर्वादाः
परमहंसपरिव्राजकाचार्याभिनवशङ्कराचार्याणां ब्रह्मलीनानन्त-
श्रीकरपात्रस्वामिचरणानाम्—
अनन्तश्रीविभूषित १००८ श्रीस्वामी करपात्रीजी महाराज,
निगमबोधघाट, दिल्ली-६
वर्तमान सञ्चारस्थान, भागलपुर दिनाङ्क ५-४-१९६५
आत्मतत्त्वविवेक, परमभगवद्भक्त महापण्डित श्रीमदुदयनाचार्यका
सुप्रसिद्ध ग्रन्थ है। यह संस्कृतभाषामे है तथा उसकी टीका भी संस्कृत-
भाषामें है। अतः संस्कृतभाषा न जाननेवाले मनीषियोंके लिये इस
ग्रन्थसे लाभ नहीं हो सकता था, यह बात खटकनेवाली थी। इस
कमीको दूर करनेके लिये राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, भागलपुरके
दर्शनविभागके प्राध्यापक पं० केदारनाथत्रिपाठीने हिन्दीमे इस ग्रन्थकी
टीका लिखकर बहुत उपयुक्त कार्य किया है। टीका सरल और सुबोध
होनेके साथ साथ शिष्ट भी है। इससे जिज्ञासुओंको बहुत लाभ होगा।
इति शिवम्।
करपात्र स्वामी