सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 400, कुल 530 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 400

अनुपलम्भवाद. ३५१
शिष्याचार्यनीलधियोर्मात्रयाऽपि जातिकृतं विशेषमुपलभामहे ।
अदृश्यत्वादयमदोष इति चेन्न, दृश्यसमवायिन्या जातेरदृश्यत्वा-
नुपपत्तेः । उपपत्तौ वा धूमादावपि अवकाशप्रसङ्गात् । तथा
चावान्तरसत्त्ववदवान्तरधूम एव वह्नेः कार्यः स्यात् इति शङ्का-
कलङ्कितत्वात् न (च) धूमसामान्यमग्निं गमयेत् ।
एवमेतत्, आद्यस्यैव तथाभावादिति चेन्न, तत्रापि शङ्काया-
उपलब्ध नहीं होती है । कारण, शिष्य और आचार्यकी नीलविषयक-
बुद्धियोंमें लेशमात्र भी जातिकृत-विशेषता अर्थात् वैजात्यको हम नहीं
पाते हैं । यदि कहो कि—दृश्य वस्तु ही अनुपलब्धिके कारण बाधित
हो जाती है । यहाँपर शिष्याचार्य बुद्धियोंमें जो वैजात्य है, वह
अदृश्य है, इसलिये अनुपलब्धिके कारण वह बाधित नहीं हो सकता
है—तो ऐसा नहीं कह सकते । क्योंकि दृश्यमें समवायसम्बन्धसे रहने
वाली जाति कभी भी अदृश्य नहीं हो सकती है । कारण, दृश्यवर्ती
जाति यदि अदृश्य हो तो धूम आदिमें भी अदृश्यजाति रहने लगेगी ।
ऐसी स्थितिमें क्षणिकविज्ञानरूप अवान्तर आत्माके समान कोई अवान्तर
धूम ही वह्निका कार्य होगा—ऐसी आशङ्का उठ जानेसे धूमसामान्यसे
अग्निसामान्यको अनुमिति नहीं हो सकेगी । अर्थात् जैसे, कारणभूत
दृश्यज्ञानोंमे प्रतिसन्धानकी प्रयोजिका अदृश्यभूत अवान्तर जाति मानते
हो, वैसे ही धूमादि दृश्यकार्योंमे भी वह्निजन्यतावच्छेदिका किसी अवा-
न्तरजातिकी संभावना होनेके कारण धूमसामान्य वह्निसामान्यका कार्य
नहीं हो सकेगा और उस धूमसामान्यसे वह्निसामान्यका अनुमान भी
नहीं हो सकेगा ।
यदि कहो कि—ऐसी ही बात है । अर्थात् अवान्तर-जातिविशेषसे
युक्त धूमविशेषसे ही अग्निका अनुमान होता है न कि धूमसामान्यसे ।
क्योंकि आद्यक्षणवाला धूम ही अग्निसे जन्य है न कि सभी धूम । उत्तर-
क्षणवर्ती धूम तो बौद्धमतमे धूमजन्य ही माना गया है—तो धूममें भी
वह शङ्का वैसे ही अवस्थित रहेगी । अर्थात् उसमें भी किसी अवान्तर
जातिकी शङ्का होनेसे वह भी अग्निका अनुमापक नहीं हो सकेगा ।