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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 394, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 394

पूर्ण होने वाले होम कर्म का उसी प्रकार विनाश करें, जिस प्रकार पक्षियों के ऊपर बाज
आकाश मार्ग से गिरता है. जो शत्रु हमारे विपरीत हिंसा कर्म करने की इच्छा करता है, उस
का आज्य नष्ट हो जाए. (३)
अपाञ्चौ त उभौ बाहू अपि नह्याम्यास्यम्.
अग्नेर्देवस्य मन्युना तेन ते ऽ वधिषं हविः.. (४)
हे हमारे निमित्त अभिचार कर्म करने वाले मनुष्य! होम कर्म में लगे हुए तेरे दोनों हाथों
को मैं पीछे की ओर बांधता हूं, जिस से वे होम करने में समर्थ न हो सकें. मंत्र का उच्चारण
करने में समर्थ तेरे मुख को भी मैं बंद करता हूं. तेरे हाथों और मुख को बांधने से अग्नि देव के
क्रोध के कारण तेरे हवि को मैं नष्ट करूंगा. (४)
अपि नह्यामि ते बाहू अपि नह्याम्यास्यम्.
अग्नेर्घोरस्य मन्युना तेन ते ऽ वधिषं हविः.. (५)
मैं अभिचार कर्म में संलग्न तेरे दोनों हाथों और मुख को बांधता हूं, जिस से तेरे हाथ
आहुति न दे सकें और मुख मंत्र का उच्चारण न कर सके. इस प्रकार अग्नि देव के भयानक
क्रोध के द्वारा मैं तेरे हवि एवं उस से सिद्ध होने वाले कर्म का विनाश करता हूं. (५)
सूक्त-७४ देवता—अग्नि
परि त्वा ऽ ग्ने पुरं वयं विप्रं सहस्य धीमहि.
धृषद्वर्णं दिवेदिवे हन्तारं भंगुरावतः.. (१)
हे अरणि मंथन से उत्तम अग्नि! तुम कर्म फलों को पूर्ण करने वाले एवं मेधावी हो. हम
राक्षसों का हनन करने के लिए तुम्हें चारों ओर धारण करते हैं. तुम घर्षक रूप वाले एवं
राक्षसों का प्रतिदिन विनाश करने वाले हो. (१)
सूक्त-७५ देवता—इंद्र
उत् तिष्ठता ऽ व पश्यतेन्द्रस्य भागमृत्वियम्.
यदि श्वातं जुहोतन यद्यश्वातं ममत्तन.. (१)
ऋत्विजो! उठो, अर्थात् अपने आसनों पर बैठे मत रहो. वसंत आदि ऋतुओं में इंद्र को
देने के लिए पकाए जाने वाले हवि के भाग को देखो. यदि वह हवि पक गया है तो उसे इंद्र के
निमित्त अग्नि में हवन कर दो. यदि वह नहीं पका है तो उसे पकाओ. (१)
श्वातं हविरो ष्विन्द्र प्र याहि जगाम सूरो अध्वनो वि मध्यम्.
परि त्वासते निधिभिः सखायः कुलपा न व्राजपतिं चरन्तम्.. (२)
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