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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 37

इंद्र स्वर्ग प्राप्त कराने शत्रुओं
का विनाश करने वाले हैं ४
स्तुति कर्ताओं को धन देने वाले इंद्र ७
इंद्र द्वारा वनस्पतियों एवं दिवसों की रचना १०
१२. इंद्र की स्तुति १-७
१३. बृहस्पति देव और इंद्र से यज्ञशाला
में आने के लिए आग्रह १-४
अग्नि से यज्ञ में आने का आग्रह ४
१४. रक्षा की कामना से इंद्र का आह्वान १-४
१५. इंद्र की स्तुति १-६
इंद्र के यज्ञ का स्थान सारा जगत् ३
१६. बृहस्पति देव की प्रशंसा १-१२
बृहस्पति ने छिपी हुई गाएं बाहर निकालीं ४
१७. इंद्र की स्तुति १-१२
इंद्र से सोमरस पीने का आग्रह ३
बृहस्पति देव की प्रशंसा ११
१८. वज्रधारी इंद्र की स्तुति १-६
१९. इंद्र की स्तुति १-७
२०. इंद्र की स्तुति १-७
पांच वर्णों में व्याप्त बल की कामना २
२१. इंद्र की स्तुति १-११
२२. वर्षा करने वाले इंद्र की प्रशंसा १-६
२३. इंद्र से यज्ञ में आने का आग्रह १-९
२४. इंद्र की स्तुति १-९
इंद्र को सोम पान के लिए बुलावा ४
धनों के विजेता इंद्र ६
२५. इंद्र की महिमा का गान १-७
अविनाशी इंद्र का पूजन ५
२६. इंद्र की स्तुति १-६
अज्ञानी को ज्ञान देने वाले सूर्य का उदय ६
२७. इंद्र की स्तुति १-६
२८. इंद्र के कार्यों का वर्णन १-४
२९. इंद्र की स्तुति तथा वर्णन १-५
३०. इंद्र के अश्वों का वर्णन १-५
इंद्र के सुंदर शरीर व शस्त्रों का वर्णन ३
इंद्र के केश ५
३१. अश्वों द्वारा इंद्र को यज्ञ में लाया जाना १-५
इंद्र का निवास ५
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