अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविराट की उत्पत्ति ९
घोड़ों आदि की उत्पत्ति १२
अश्वमेध यज्ञ १५
७. नक्षत्रों की स्तुति १-५
विभिन्न नक्षत्रों के अनुकूल होने की कामना २
८. नक्षत्रों की स्तुति १-७
अट्ठाईस नक्षत्र २
नक्षत्रों के देवताओं का अभिनंदन ३
इंद्र की स्तुति ६
९. देवों की स्तुति १-१४
ज्ञानेंद्रियों का वर्णन ५
शांति की कामना ९
१०. इंद्र और अग्नि की स्तुति १-१०
सभी देवों से सुख की याचना ४
सोम ७
११. सत्य पालक देवों और पितरों की स्तुति १-६
१२. उषा की प्रशंसा १
१३. इंद्र की प्रशंसा १-११
इंद्र की सहायता से शत्रु विजय की कामना ३
शत्रु को नष्ट करने वाले बृहस्पति ८
१४. द्यावा और पृथ्वी की स्तुति १
१५. अभय करने वाले इंद्र आदि की प्रशंसा १-६
कर्मों की सिद्धि हेतु इंद्र से प्रार्थना ३
१६. सविता देव की स्तुति १-२
अश्विनीकुमारों की स्तुति ३
१७. पृथ्वी की स्तुति १-१०
अंतरिक्ष का स्थायी देवता २
सोम व रुद्र की स्तुति ३
१८. शत्रुओं के विनाश की कामना १-१०
वायु से शत्रु विनाश की कामना २
१९. मित्र नाम वाले अग्नि आदि देवों की स्तुति १-११
वायु द्वारा पुर की रक्षा ३
२०. इंद्र, अग्नि, सविता आदि देवों की स्तुति १-४
सभी प्राणियों के पालनकर्ता प्रजापति ३
२१. छंदों के लिए आहुति १
२२. अंगिरा गोत्र वाले ऋषियों के लिए आहुति १-२१
छठे के लिए आहुति २
२३. ऋषियों के लिए आहुति १-३०
पांच ऋचाओं की रचना करने करने
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