अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे बाण! तेरा विष बुझा हुआ फल विष रहित हो जाए. इस के बाद तेरा विष प्रभावहीन
हो जाए. सारहीन वृक्ष से बना हुआ और तुझ से संबंधित धनुष भी प्रभावहीन हो जाए. (६)
ये अपीषन् ये अदिहन् य आस्यन् ये अवासृजन्.
सर्वे ते वध्रयः कृता वध्रिर्विषगिरिः कृतः.. (७)
जो लोग विषपूर्ण जड़ीबूटियों को पीस कर खिलाते हैं, जो लोग लेप के रूप में विष का
प्रयोग करते हैं, जो विष को दूर से फेंकते हैं तथा जो समीप रह कर अन्न, फल आदि में विष
मिला देते हैं, मैं ने अपने मंत्र के प्रभाव से इन सब को शक्तिहीन बना दिया है. जिन पर्वतों पर
कंद मूल के रूप में विष उत्पन्न होता था, उन्हें भी मैं ने शक्तिहीन कर दिया है. (७)
वध्रयस्ते खनितारो वध्रिस्त्वमस्योषधे.
वध्रिः स पर्वतो गिर्यतो जातमिदं विषम्.. (८)
हे विषयुक्त जड़ीबूटी! तुझे खोदने वाले शक्तिहीन हो जाएं तथा मेरे मंत्र के प्रभाव से तू
भी प्रभावहीन हो जा. जिन पर्वतों पर विषैले कंदमूल उत्पन्न होते हैं, वे भी शक्तिहीन हो जाएं.
(८)
सूक्त-७ देवता—वनस्पति
वारिदं वारयातै वरणावत्यामधि.
तत्रामृतस्यासिक्तं तेना ते वारये विषम्.. (१)
वारण वृक्ष जहां उत्पन्न होते हैं, उस वारणावती का विषहारी जल हम मनुष्यों के विष
को दूर करता है. उस जल में स्वर्ग स्थित अमृत का विषनाशक प्रभाव विद्यमान है. इस कारण
मैं उस अमृतमय जल से तेरे कंद, मूल आदि से उत्पन्न विष को दूर करता हूं. (१)
अरसं प्राच्यं विषमरसं यदुदीच्यम्.
अथेदमशराच्यं करम्भेण वि कल्पते.. (२)
मेरी मंत्र शक्ति से पूर्व दिशा और उत्तर दिशा में उत्पन्न होने वाला विष प्रभावहीन हो
जाए. दक्षिण, पश्चिम तथा नीचे की दिशा में उत्पन्न होने वाले विष करंभ (भात) से
सामर्थ्यहीन हो जाए. (२)
करम्भं कृत्वा तिर्यं पीबस्पाकममुदारथिम्.
क्षुधा किल त्वा दुष्टनो जक्षिवान्त्स न रूरुपः.. (३)
हे दुष्ट शरीर वाले विष! बिना जाने हुए खाया हुआ तू चरबी को जलाने वाला और उदर
संबंधी रोगों का जनक है. इस पुरुष ने तुझे करंभ (भात) समझ कर खाया था. तू इस पुरुष
को मूर्च्छित मत बना. (३)
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