सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 102 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

४८ अष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः )
८९ छन्दसि परिपन्थिपरिपरिणौ पर्यवस्थातरि। | १११ काण्डाण्डादीर्नीरचौ।
९० अनुपद्यन्वेष्टा। | ११२ रजःकृष्यासुतिपरिषदो वलच्।
९१ साक्षाद् द्रष्टरि सञ्ज्ञायाम्। | ११३ दन्तशिखात्सञ्ज्ञायाम्।
९२ क्षेत्रियच्परक्षेत्रे चिकित्स्यः। | ११४ ज्योत्स्नातमिस्राशृङ्गिणोर्जस्विनूर्जस्वलगोमिन्मलिममलीमसाः।
९३ इन्द्रियमिन्द्रलिङ्गमिन्द्रदृष्टमिन्द्रसृष्टमिन्द्रजुष्टमिन्द्रदत्तमिति वा। | ११५ अत इनिठनौ।
९४ तदस्यास्त्यस्मिन्निति मतुप्। | ११६ व्रीह्यादिभ्यश्च।
९५ रसादिभ्यश्च। | ११७ तुन्दादिभ्य इलच्च।
९६ प्राणिस्थादातो लजन्यतरस्याम्। | ११८ एकगोपूर्वाट् ठञ्नित्यम्।
९७ सिध्मादिभ्यश्च। | ११९ शतसहस्रान्ताच निष्कात्।
९८ वत्सांसाभ्यां कामबले। | १२० रूपादाहतप्रशंसयोर्यप्।
९९ फेनादिलच्च। | १२१ अस्मायामेधास्रजो विनिः।
१०० लोमादिपामादिपिच्छादिभ्यः शनेलचः। | १२२ बहुलं छन्दसि।
१०१ प्रज्ञाश्रद्धार्चाभ्यो णः। | १२३ ऊर्णाया युस्।
१०२ तपःसहस्राभ्यां विनीनी। | १२४ वाचो ग्मिनिः।
१०३ अण्च। | १२५ आलजाटचौ बहुभाषिणि।
१०४ सिकताशर्कराभ्यां च। | १२६ स्वामिन्नैश्वर्ये।
१०५ देशे लुबिलचौ च। | १२७ अर्शआदिभ्योऽच्।
१०६ दन्त उन्नत उरच्। | १२८ द्वन्द्वोपतापगर्ह्यात्प्राणिस्थादिनिः।
१०७ ऊषसुषिमुष्कमधो रः। | १२९ वातातीसाराभ्यां कुक्च।
१०८ द्युद्रुभ्यां मः। | १३० वयसि पूरणात्।
१०९ केशाद् वोऽन्यतरस्याम्। | १३१ सुखादिभ्यश्च।
११० गाण्ड्यजगात्सञ्ज्ञायाम्। | १३२ धर्मशीलवर्णान्ताच।
| १३३ हस्ताज्जातौ।
| १३४ वर्णाद् ब्रह्मचारिणि।