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अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

पञ्चमाध्याये द्वितीयः पादः ४७
४० किमिदम्भ्यां वो घः। | ६३ तत्र कुशलः पथः।
४१ किमः सङ्ख्यापरिमाणे डति च। | ६४ आकर्षादिभ्यः कन्।
४२ सङ्ख्याया अवयवे तयप्। | ६५ धनहिरण्यात्कामे।
४३ द्वित्रिभ्यां तयस्यायज्वा। | ६६ स्वाङ्गेभ्यः प्रसिते।
४४ उभादुदात्तो नित्यम्। | ६७ उदराट् ठगाद्यूने।
४५ तदस्मिन्नधिकमिति | ६८ सस्येन परिजातः।
दशान्ताड् डः। | ६९ अंशं हारी।
४६ शदन्तविंशतेश्च। | ७० तन्त्रादचिरापहृते।
४७ सङ्ख्याया गुणस्य निमाने | ७१ ब्राह्मणकोष्णिके सञ्ज्ञायाम्।
मयट्। | ७२ शीतोष्णाभ्यां कारिणि।
४८ तस्य पूरणे डट्। | ७३ अधिकम्।
४९ नान्तादसङ्ख्यादेर्मट्। | ७४ अनुकाभीकाभीकः कमिता।
५० थट् च छन्दसि। | ७५ पार्श्वेनान्विच्छति।
५१ षट्कतिकतिपयचतुरां थुक्। | ७६ अयःशूलदण्डाजिनाभ्यां
५२ बहुपूगगणसङ्घस्य तिथुक्। | ठक्ठञौ।
५३ वतोरिथुक्। | ७७ तावतिथं ग्रहणमिति लुग्वा।
५४ द्वेस्तीयः। | ७८ स एषां ग्रामणीः।
५५ त्रेः सम्प्रसारणं च। | ७९ शृङ्खलमस्य बन्धनं करभे।
५६ विंशत्यादिभ्यस्तमडन्य- | ८० उत्क उन्मनाः।
तरस्याम्। | ८१ कालप्रयोजनाद् रोगे।
५७ नित्यं शतादिमासार्धमास- | ८२ तदस्मिन्नन्नं प्राये सञ्ज्ञायाम्।
संवत्सराच्च। | ८३ कुल्माषादञ्।
५८ षष्ट्यादेश्चासङ्ख्यादेः। | ८४ श्रोत्रियश्छन्दोऽधीते।
५९ मतौ छः सूक्तसाम्नोः। | ८५ श्राद्धमनेन भुक्तमिनिठनौ।
६० अध्यायानुवाकयोर्लुक्। | ८६ पूर्वाद्दिनिः।
६१ विमुक्तादिभ्योऽण्। | ८७ सपूर्वाच्च।
६२ गोषदादिभ्यो वुन्। | ८८ इष्टादिभ्यश्च।