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अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 20

२० अष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः )
४६ सञ्ज्ञायां भृतृवृजिधारिसहि-
तपिदमः।
४७ गमश्च।
४८ अन्तात्यन्ताध्वदूरपारसर्वा-
नन्तेषु डः।
४९ आशिषि हनः।
५० अपे क्लेशतमसोः।
५१ कुमारशीर्षयोर्णिनिः।
५२ लक्षणे जायापत्योष्टक्।
५३ अमनुष्यकर्तृके च।
५४ शक्तौ हस्तिकपाटयोः।
५५ पाणिघताडौ शिल्पिनि।
५६ आढ्यसुभगस्थूलपलितनग्नान्ध-
प्रियेषु च्व्यर्थेष्वच्चौ कृञः
करणे ख्युन्।
५७ कर्तरि भुवः खिष्णुच्खुकञौ।
५८ स्पृशोऽनुदके क्विन्।
५९ ऋत्विग्दधृक्स्रग्दिगुष्णिगञ्चु-
युजिक्रुञ्चां च।
६० त्यदादिषु दृशोऽनालोचने
कञ्च।
६१ सत्सूद्विषद्रुहदुहयुजविद्भिदच्छि-
द्जिनीराजामुपसर्गेऽपि
क्विप्।
६२ भजो ण्विः।
६३ छन्दसि सहः।
६४ वहश्च।
६५ कव्यपुरीषपुरीष्येषु ज्युट्।
६६ हव्येऽनन्तःपादम्।
६७ जनसनखनक्रमगमो विट्।
६८ अदोऽन्नन्ने।
६९ क्रव्ये च।
७० दुहः कब्घश्च।
७१ मन्त्रे श्वेतवहोक्थशस्पुरोडाशो
ण्विन्।
७२ अवे यजः।
७३ विजुपे छन्दसि।
७४ आतो मनिन्क्वन्विब्वनिपश्च।
७५ अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते।
७६ क्विप् च।
७७ स्थः क च।
७८ सुप्यजातौ णिनिस्ताच्छील्ये।
७९ कर्तर्युपमाने।
८० व्रते।
८१ बहुलमाभीक्ष्ण्ये।
८२ मनः।
८३ आत्ममाने खश्च।
८४ भूते।
८५ करणे यजः।
८६ कर्मणि हनः।
८७ ब्रह्मभ्रूणवृत्रेषु क्विप्।
८८ बहुलं छन्दसि।
८९ सुकर्मपापमन्त्रपुण्येषु कृञः।
९० सोमे सुञः।

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