सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
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८८ / सम्राट अशोक के अभिलेख
• सुहृदयेन = सहानुभूति रखने वाले के द्वारा। सं.- सुहृदयेन। 'सुहृदयः-
सुष्ठु हृदयं यस्य। प्रयत्नसम्पन्नः।' (शब्द०)। पालि-सुहृदयो (सुहृदयः)।
• सहायेन = सहायक द्वारा। सं.- सहायेन। (सहायः-सह एति इति
सहायः। अनुकूलः।) पालि-सहाये (सहायः)।
• ओवादितव्य = दृढ़तापूर्वक कहना चाहिए। सं.- अववदितव्यम्।
(कार्यमवलम्ब्य वादो वदनं कथनमुपवादः)। 'अववादः-निन्यायाम्, विश्वस्ते,
आज्ञायाम्, अववचने च।' (शब्द०)। 'अववादस्तु निर्देशो निदेशः शासनं च
तत्' (अमर०)। 'अवः सान्त्वन इति षड्गविणयः' (उपसर्गार्थ-द्वितीय
खंड, पृ.३०१)। पालि-ओवदति (अववदति)।
• पकरणे = मामले में। सं.- प्रकरणे। 'प्रकथं स्यात्सत्त्वार्थे' (अनेकार्थ०
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