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सर्वकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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पृष्ठ 35

आर्यभटीयस्य विषयाणां सूचीपत्रम् ॥ ३
विषय पृष्ठाङ्क
दृष्टि के वैषम्य होने का कारण— ५८-५९
प्रतिमण्डल का प्रमाण और उस का स्थान— ५९
स्फुट ग्रहों का अन्तराल प्रमाण— ५९-६०
भ्रमण प्रकार— ६०-६१
उच्च, नीच वृत्त के भ्रमण का प्रकार— ६१-६२
मन्द और शीघ्र के ऋण और धन का विभाग— ६२-६३
शनि, गुरु, मङ्गल (स्फुट) ६३-६६
भ, तारा, ग्रहों का विवर लाना— ६६
तृतीय पाद की विषयसूची समाप्त हुई ।
अपमण्डल का संस्थान— ६७-६८
अपक्रम मण्डल चारी ग्रहगण— ६८
अपमण्डल के चन्द्रमा का पात उत्तर से दक्षिण— ६८-७०
चन्द्रमा आदि का दूर और निकटता से सूर्य प्रभा से उदयास्त ज्ञान— ७०-७१
स्वतः अप्रकाश भूमि आदि के प्रकाश का हेतु— ७१
कदम्बा और भूसंस्थान— ७१-७२
भूगोल के ऊपर प्राणियों का निवास— ७२
कल्प में भूमि की वृद्धि और ह्रास— ७२
भूमि का पूर्व की ओर चलना— ७२-७३
भपञ्जर के भ्रमण का कारण— ७३
मेरु प्रमाण और मेरु का स्वरूप— ७३-७४
मेरु, बड़वामुख आदि का अवस्थान— ७४
भूमि के चारों ओर पृथिवी के चतुर्थ भाग में ४ नगरियां— ७४-७५
लङ्का और उज्जयिनी के बीच का देश— ७५-७६
भूपृष्ठस्थित ज्योतिश्चक्र के दृश्य और अदृश्य भाग— ७६
ज्योतिश्चक्र में देवासुर दृश्य भाग— ७६-७७
देवादिकों का दिन प्रमाण— ७७-७८
गोल कल्पना— ७८-७९
क्षितिज में नक्षत्र और सूर्यादि ग्रहों का उदयास्त— ७९-८०
द्रष्टा के कारण ऊंचे नीचे का विभाग— ८०
दृङ्मण्डल, दृक्क्षेप मण्डल— ८०