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सर्वकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 535 में से

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पृष्ठ 243

196 अपराजितपृच्छा
गणितशब्दनिघण्टुर्नाम द्विचत्वारिंशं सूत्रम् ॥ ४२ ॥
विश्वकर्मोवाच -
शब्दा उक्ता अङ्गुलाद्या निघण्टौ भाषितानि च।
भूयोजनप्रमाणानि प्रवक्ष्यामि यथार्थतः ॥ १ ॥
विश्वकर्मा बोले कि निघण्टु में भाषित जो शब्द अङ्गुल से आरम्भ करके भूमि
के योजन प्रमाणों के लिए कहे गए हैं, उनको मैं ठीक-ठीक तरह से कहता हूँ।
अथाङ्कज्ञानमाह -
क्ष्माक्षितितनुशब्दरूप-मन्त्रचन्द्राश्चैकपर्यायाः।
पक्षयुग्मनेत्रद्वन्दगोलकं दस्त्राश्विन्यौविषाणचरणा द्वयोः ॥ २ ॥
एकादि संख्याओं के पर्यायार्थक शब्द क्रमशः ये हैं- संख्या 1 के लिए क्ष्मा,
क्षिति, तनु, शब्द, रूप, मन्त्र और चन्द्रमा शब्दों का प्रयोग होता है। इसी प्रकार संख्या
2 के लिए - पक्ष, युग्म, नेत्र, द्वन्द, गोलक, हस्त, अश्विनौ, विषाण और चरण होते हैं।
अग्नयो गुणरामाश्च कालसङ्ख्याविधिस्तथा।
शक्तयो हरनेत्राणि त्रयाणां वाचका इमे ॥ ३ ॥
संख्या 3 के लिए अग्नि, गुण, राम, काल, संख्या, विधि, शक्ति-त्रिशूल,
हरनेत्र - इतने तीन के पर्याय हैं।
कृतकोणयुगविध्यास्य तुर्याम्बुधि दिग्विदिग्मङ्गला।
गोचरणमार्गाख्यातं भागाः श्रुतयश्च सङ्ख्या चतुर्णाम् ॥ ४ ॥
संख्या 4 के लिए कृत, कोण, युग, विधिमुख या आस्य, तुर्य, अम्बुधि, दिक्-
विदिक्, मङ्गल, गोचरण, मार्ग, भाग, श्रुतियाँ— ये संख्या चार के पर्याय हैं।
इषुविषयतत्त्वेन्द्रियधृषण ? (स्वर्द्रु !)शम्भुवक्त्र क्षेत्राणि।
वास्तुलिङ्ग प्रतीता हत ? (व्रत !)भवमुखानि च पञ्चानाम् ॥ ५ ॥
संख्या 5 के लिये इषु, विषय, तत्त्व, इन्द्रिय, (धृषण ? स्वर्दु), भूषण,
शम्भुवक्त्र, क्षेत्र, वास्तुलिङ्ग, प्रतीत, हत ? भवमुख - ये पाँच के पर्याय हैं।
गायत्रीदर्शनखण्डरसर्तुयान कर्णिक ? ( कोणक! ) रागषण्मिश्रम्।
द्विशक्ति काणगण रत्नशक्त्या ननामृत ग्रन्थ स्कन्दवक्त्रं षण्णाम् ॥ ६ ॥
संख्या 6 के लिए गायत्री, दर्शन, खण्ड, रस, ऋतु, यान, कर्णिक ? (कोणक),
राग, षण, मिश्र, द्विशक्ति, काणगण, रत्नशक्ति, नानामृत, ग्रन्थ, स्कन्दवक्त्र
(कार्तिकेय के मुख, षडानन) - इतने छह संख्या के पर्याय हैं।