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सर्वकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 535 में से

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पृष्ठ 150

ालयस्तथा ॥ 13 ॥
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"एवमक्षयलिङ्गेभ्यः सर्वभूतालयस्तथा ॥ 13 ॥"
Is the number "13" in Devanagari or Arabic?
Look at: "॥ 13 ॥"
It is Arabic numerals: "13"!
Wait, let's check all the shloka numbers:
Line 7: ॥ 13 ॥
Line 11: ॥ 14 ॥
Line 13: ॥ 15 ॥
Line 15: ॥ 16 ॥
Line 17: ॥ 17 ॥
Line 25: ॥ 18 ॥
Line 27: ॥ 19 ॥
All shloka numbers are in Arabic numerals: 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19!
Wait, look at the page number at the top right: "101" (Arabic).
Top left: "सूत्र-२२" (Devanagari numerals).

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इस संसार की सृष्टि में उत्पन्न सभी द्वीप, क्षेत्र, जो सभी जीवों, प्राणियों के

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लिए रहने के स्थान बने हुए हैं, वे सब भी अक्षयलिङ्ग से ही उत्पन्न हुए हैं।

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शेषोद्भवस्तथा पुत्र जीवा वै काश्यपादयः ।
Wait, look at