अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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द्वात्रिंशोऽध्यायः
ब्राह्मणरूपधारी धर्म और जनकका ममत्वत्यागविषयक
संवाद
ब्राह्मण उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् ।
ब्राह्मणस्य च संवादं जनकस्य च भाविनि ।। १ ।।
ब्राह्मणने कहा—भामिनि! इसी प्रसंगमें एक ब्राह्मण और राजा जनकके संवादरूप
प्राचीन इतिहासका उदाहरण दिया जाता है ।। १ ।।
ब्राह्मणं जनको राजा सन्नं कस्मिंश्चिदागसि ।
विषये मे न वस्तव्यमिति शिष्ट्यर्थमब्रवीत् ।। २ ।।
एक समय राजा जनकने किसी अपराधमें पकड़े हुए ब्राह्मणको दण्ड देते हुए कहा
—‘ब्रह्मन्! आप मेरे देशसे बाहर चले जाइये’ ।। २ ।।
इत्युक्तः प्रत्युवाचाथ ब्राह्मणो राजसत्तमम् ।
आचक्ष्व विषयं राजन् यावांस्तव वशे स्थितः ।। ३ ।।