अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
पृष्ठ 1030, कुल 2600 में से
संदर्भ में पढ़ें-दन्ताद्?
Ah! "अदन्ताट्टाप्" (अदन्तात् टाप्)!
So line 24 end is: "...कार-" and line 25 is "दन्ताद्"? No: "अकारान्तत्वात् टाप्"?
Wait, look at line 24 end:
'बा', 'धि', 'त्वा', 'ऽ', 'जा', 'द्य', 'त', 'श्चा', 'का', 'र'-
Wait: 'चाकार-' or 'त्वाकार-'?
No! Panini sutra: "अजाद्यतष्टाप्" (अजादि + अतः टाप्).
"अतः" = अकारान्तात्!
So: "बाधित्वाऽजाद्यतश्चाकारान्ताट्टाबेवेति" or "बाधित्वाऽजाद्यतश्चादन्ताट्टाबेवेति"!
Let's read the characters at the end of line 24 and start of line 25:
End of line 24:
...बाधित्वाऽजाद्यतश्चा (or बाधित्वाऽजावचा-?)
Look at:
बा (bā) धि (dhi) त्वा (tvā) ऽ (avagraha) जा (jā) द्य (dya) तश्चा (taścā - or तश्च / तश्चा)
Wait, after 'जाद्य':
There is 'त' (ta).
Then 'श्चा' (ś