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सर्वकोश
अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary

महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished112 पृष्ठ

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पृष्ठ 95

मूर्धजाः, R, IO वदंति नः, B परममूर्ध्व....ते विंदति .-(107)
L ॰ स्वर्णी ॰, B ॰ स्वर्णा ॰.—(108) L मासार्द्धमध्ये तु.—(109)
L सामान्यलेप, M समये लेप, B सामलैलेप, V समानैर्लेप
—(110) B, IO, R सुगंधः —(111) M काम ॰ —(112) L शैलेयं,
B स्थौलेयजलं ॰, M स्यागेयं .—(113) B उशीरैश्च, M उशीरै-
श्चामरैरंगेभि ॰.—(114) IO सुरभिः प्रदः .—(115) M ॰ शीरमुस्ता-
गरुक्रचोरकैः .—(116) L कृतो निजांगेषु ; M कृतोयमन्नेषु .—
(117) M चन्दनेनोदितः .—(118) L कन्काचन्द्रः M, R, IO कनका-
चन्द्रो .—(119) L जाति ॰ पूतिका, V ॰ पूतिकौ -(120) L omits
तु and accordingly writes ॰ पिष्टैरेभिर्नाग ॰; B सुसूक्ष्म ॰ रेतैस्तु,
M सुलक्ष्मरैभि पिष्टैस्तु .—(121) M सुगंधये रसैर्लेप .-(122) L
योगो .—(123) B महीभृतां .—(124) L ॰ क्षौद्रेयं ॰, M ॰ क्षोणां-
पयद्राणां .—(125) R, IO केसरस्य द्विपंच .—(126) M स्तुर्भैव
छाग नगस्य तु ; B च instead of तु .—(127) M येभिरत्कासु-
गन्धिश्च क ॰ संज्ञितः .—(128) M नखपत्यात्रयाम्मोदमांसीमानक-
रञ्जकः ; L नखपष्यामयं भोग्यं मांसी ॰ जबः; V ॰ मांसी मिसिकर-
ञ्जकाः .—(129) L M समं .—(130) L ॰ क्षौणेय ॰; B च instead
of तु .—(131) L तैलं .—(132) B ॰ गर्भाढ्यः .—(133) L शु-
क्रा सा ; B भक्तेतांबूलसंयुक्तां .—(134) L, M क्षौणेयं .-(135) IO
जातिपत्रकं, R जातकोशकं .—(136) L, R मधुना तेषां .—(137) L
कृत्वा .—(138) B द्विसंध्ययोः .—(139) L ॰ वासि .—(140) L, B
काम्बोज ॰, IO काम्बोजि ॰, M काम्भोजबीजं .—(141) M मधुर-
तान्वितम्, R, IO पक्कघृता ॰.-(142) M प्रोल्लीढमानस्तद्वक्त्रं.-(143)