अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)
Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary
महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा
DevanagariSanskritpublished112 पृष्ठ
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—(203) M ° संसिद्धि °; B, IO °सिद्धं कटुतैलं ; M IO विमर्दन त्,
B वि....येत् .—(204) B, IO मृगीदृशाम् .—(205) M तिलतैलो-
द्भवं .—(206) व्योषं रिजालस्तु .—(207) M पश्चमृद्द्भिग्निना .—
(208) M तन्नश्शणाणकुचाणकुचा, B तन्नस्येन, IO तत्तैलन –(209) L
वलातण्डुल °, B, IO बलातण्डुल .—(210) L पीनौ तुङ्गौ .—
(211) L पतन्ति.
————
VII.
(1) B ° करणमुच्येत .—(2) L कामिनीप्रीतिजनकं .—(3) L
धीव्यं .—(4) M एतान्पिष्ट्वा .—(5) L कुर्याच्च तिलकं .—(6) B
तत्तक्षणादेवमायाति .—(7) M मुनिना उक्तोयं योग उत्तमः