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सर्वकोश
अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary

महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished112 पृष्ठ

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in IO. — (65) IO R तस्मात्तत्प्रीतये . — (66), L ° रिपुश्चैतत्सर्वं.
— (67) M सचूर्ण. — (68) IO, R लिंगे यस्य; M लिप्तालिङ्गो; L
विधीयताम्. — (69) L ° दपि सूक्ष्मं तद्; B मुहूर्त्तादपि; M °सू-
क्ष्माच्च. — (70) L ° लिङ्गो वृद्धिमवाप्नुयात्. — (71) L तिलाः
श्वेतांश्र्चेति सर्वं संपेप्य मधुना सह; V संपिष्ट्वा (!!); M तिलैश्चैव
निसंपत्य; IO तिलाश्चैतानि . — (72) L कुच instead of स्तन;
V योनि instead of पाली; M प्रयाति कर्णपालिका तनुलिङ्ग°
(73) M कुष्ठलवणं . — (74) V घृष्टे . — (75) B विमर्दयेत् . — (76)
M भविष्यति, L भवेद् ध्रुवम् . — (77) M ° वलिकर्कैस्समुद्भवम्.
(78 M तैल