अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)
Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary
महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा
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II.
(1) IO, M कक्षौ. — (2) L ॰जानुनि पुनर्मुष्ट्यासकृद् ॰; that
s to say, it omits गुल्फे-शनकैर् (stanza 3). — (3) IO, P 238
शुक्राशुक्र॰ — (4) M संदद्यात्कुचपेटिकां, B संदद्यात्तु चपेटकं,
IO, ॰त्कुचपैटकं — (5) V wrongly ॰ मुष्ट्या सकृद्. — (6) L
दन्तैर्नखैः सादरम्. — (7) M ॰विधौ. — (8) L नीताः — (9) L
॰नयना. — (10) L गण्डपाली नितम्बे. — (11) M विदधाति रदनैः
(12) L सीत्कारकारि वक्रामतिलघुनलिनीं !! B पदिपदि —
(13) IO द्रावयेत्तां .— (14) L, M, IO नखादि; IO कृत्वा .—
(15) B, M ॰नयनां .— (16) M युगराज्यातिथ्यां. — (17) M ॰द्रव-
वशं. — (18) V सहर्षाम्. — (19) L छिन्द्यादाशु. — (20) M यच्छन्न-
खान्यादरात् .— (21) M दोर्मूले नखरै सकच्छकलितं कुर्वन्तृतीयां
तिथौ .— (22) M कुर्वन्निजां; L कुर्याद्वशे कामिनीं .— (23) B,
IO कुचं .— (24) M चञ्चुयुगलं परिपीड्य; B, IO परिचुम्ब्य .—
(25) B, P 204, 238 केशांश्च .— (26) L चित्रिणीमपि .— (27) L
पाणिं .— (28) This line is wanting in L. — (29) L सुतकामवा-
रिनिचयां .— (30) M समालोडयेत् .— (31) M प्राश्वत्पाणिरुहैश्च
लिख्य .— (32) B गंडयुगले, M ताथपलको .— (33) M दशित्वा
धरं .— (34) M दिशेत् .— (35) M संकृष्येच्चिकुरान्वि॰. — (36) L
पाणिभ्यां .— (37) M , करपाणि ॰. — (38) V तृतीयास्त्वलं, M
तृतीयाबलं, L ॰दिने .— (39) M कुर्यात्प्रियां .— (40) L कृतौष्ठ-
पानः .— (41) L परिरम्य रदच्छदं पिबन् सुरतेशो रतिभावको-
विदः, M रदनछदं वचनाघातरतो; IO, R ॰रसे .— (42) V