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अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary

महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished112 पृष्ठ

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पृष्ठ 105

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मातृ . —(98) L, IO, R, M ॰च्छदं.—(99) V यदि.—(100) M
निरागसाकृता, IO तदातिरागतः.—(101) L स पत्न्याः.—(102)
L सुभृशकलुषं.—(103) L ॰ वाक्यं, IO सभयचकित ॰.—(104)
L मुनिरेनां.—(105) L॰ मन्दिरे .—(106) M ॰चिरायतेक्षण.
(107) L विलास॰—(108) M सुरताय च पत्युरालयेत्कवय॰ .—(107)
L, R विदुः.—(110) L प्रेषयित्वापि, M प्रेषयित्येव, IO प्रेषयित्वै-
क, R प्रेषयत्वाथ.—(111) L स्वयमतितरलोला.—(112) IO परि-
ताप्यत, M परितापत.—(113) L सकलकार्यकला ॰.—(114) L
सकलसौरुयसमन्विता, M ॰वितर्पिता, IO ॰विचिंतिता, R वि-
मोहिता, P 204 ॰ विवंचिता.—(115) IO चपलाक्षी.—(116) L,
V add the following lines:
वासकसज्जा समुत्कण्ठा स्वाधीनभर्तृका * तथा।
कलहान्तरिता चापि विप्रलब्धाभिसारिका।
खण्डिता प्रोषिता चैव नायिकाश्चाष्टधा स्मृताः ** ॥
(117) IO अविदित ॰रंजते यः सभावं, R ॰रागात्संव्रजे —(118)
R, P 204 सलीले.—(119) L सुखमविकलमेवं V कल॰मेवं.—(120) L, V
प्राप्नुयान्मानवः सः, M मानवस्यः.—(121) L ॰शेखरे —(122) L
तदर्द्धासने .—(123) L ॰ रङ्गकाविता .
———

  • L ॰पतिका. • ** L ॰ चाष्टसंस्मृताः.