अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)
Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary
महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा
पृष्ठ 101, कुल 112 में से
संदर्भ में पढ़ें25
(81) M प्रगृह्य .—(82) M सुरतावकाशे .—(83) M प्रविष्टाः .—(84)
IO श्रुता मया .—(85) V °रति°, M क्रमाद्या सुरतः प्रकारः,
B बाह्यतरप्रचारः .—(86) L, B, M प्रसिद्ध°; L बहुशो वदन्ति
न दर्शिता; M प्रसिद्धबन्धाद्बहुशोपपत्र, B, IO परेत्र .—(87) L
ते, M ° शङ्कयात्र .
X.
(1) L स्वात्मानु रूपं, M सामान्यरूपाः परिधाय .—(2) M
पूर्वं पुमान् चरेद्वाह्य °.—(3) M ° पराङ्गदेशे .—(4) L साध्या .—
(5) M अविश्लथानं यमितोरु°.—(6) L तथैवानतकन्धरं च, B
स्थितं तथा व्यानतकं रसज्ञैः.—(7) M वदामि .—(8) B भोगविलास°, M
भोगविभागपद्माः.—(9) M, L, V °मन्दिरे यः.—(10) All my manus-
cripts ° द्वयमुद्गृहीत्वा (!) .—(11) B स्त्रीपादमेकं .—(12) V, B,
IO, R ° पाणियुग्मम् .—(13) M भूमौ .—(14) L तथा .—(15) V
°युग्मातूर्ध्वं .(16) B P 238 स्मरवज्रनामा, IO स्मरनामयुक्तः .—
(17) M श्रेष्ठेस्तदा, B श्रेष्ठः .—(18) B केचित्तदूरुद्वय रमते .—
(19) L, V ° रवतारिताख्यः, M ° रविदारताभ्यः, ग ° रोथिताकि-
तारुयाः, B ° रविदारिकाख्यः, R, IO ° रविदारिताख्यः.—(20)
L, IO कान्तां, M कान्ता .—(21) R, IO ऊरुयुगं .—(22) B र-
मते .—(23) V, B, M निपीड्य .—(24) B कामालय °, M कामाङ्कु-
श °.—(25) L, M चेष्टिता °, B वेष्टिका °.—(26) B, IO, R, P 204,
238 तदेति .— (27) M अर्थ, B अतो विधाय, R, IO अथो.—
(28) V प्रबलां; M प्रबला तमेव भर्ता यथाचेच्च (?) विदारितं तत्.
—(29) M, B विलासिनी, R, IO यदा स्त्रियः; B संगत °.—(30)