अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय-पांच
अशफाक के क्रांतिकारी जीवन की पृष्ठभूमि :
समाजवादी विचारधारा का प्रभाव - क्रांति पथ का वरण
आज भारत देश स्वतंत्र है। हम सब स्वतंत्रता के विशाल वृक्ष की
शीतल छाया का आनन्द ले रहे हैं, उसके मधुर फलों का स्वाद ले रहे हैं।
लेकिन स्वतंत्रता का बीज बोने में तमाम देश भक्त क्रांतिकारियों के साथ
अपने रक्त से सींचने वाले अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और
अशफाक उल्ला खाँ का स्थान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन दोनों
क्रांतिकारियों में रेखांकित करने योग्य महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों
क्रांतिकारी होने के साथ-साथ रचनाकार भी थे, कवि थे। अशफाक और
बिस्मिल स्वतंत्रता आन्दोलन के क्रांतिकारी सिपाही ही नहीं वरन् वे कलम
के भी सिपाही थे। इनकी रचनाएं आग उगलती तो थी ही, संवेदना के
स्तर पर भी स्तरीय हुआ करती थीं। यह भी कहा जा सकता है कि दोनों
शस्त्र और शास्त्र में पारंगत थे जैसे एक माला के दो सुमन हो, एक से
बढ़कर एक सुगंध बिखेरने वाले। एक नदी के दो घाट, दोनों का पानी
एक, दिल एक, दिमाग एक, कर्म एक, धर्म एक। दोनों फाँसी पर चढ़े,
शहीद हुए, अमर हुए। राष्ट्र हित चिन्तन में दोनों का जीवन समर्पित हो
गया, धन्य हो गया।¹
अशफाक उल्ला खाँ के हृदय में मौलवी साहब की शिक्षाओं का
असर कभी गया नहीं। बाल्यकाल से ही अंग्रेजों के प्रति घृणा तो थी ही,
जिसका जिक्र पहले भी किया जा चुका है। लेकिन बाद में चलकर उनका
मानसिक रूप से समाजीकरण हो गया।
- साहित्य भारती, जुलाई-सितम्बर 1997, प्रधान सम्पादक - विनोद चन्द्र
पाण्डेय पृष्ठ 76 (लेख-जनार्दनदास)
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