अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 21, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंअशफाक ने कहा है कि -'मेरा दिल गरीब किसानों और दुखियों
मजदूरों के लिए हमेशा दुखी रहा है। मैं तो अपने अय्यामें फरारी में भी
अक्सर इनकी हालत देखकर रोया किया हूँ क्योंकि मुझे इनके साथ दिन
गुजारने का मौका मिला है। निश्चित ही अशफाक उल्ला खाँ उस दौर के
क्रांतिकारियों में एक मजबूत चरित्र के रूप में नजर आते हैं। जहाँ एक
तरफ संवेदनशील और प्रगतिशील कवि, शायर के रूप में हमे नजर आते
है वही वे एक कुशल पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में दृढ़ता से खड़े दिखते
हैं और अन्त तक उनके विचारों में कोई परिवर्तन नहीं आया। प्रमुख
क्रांतिकारी नेता अमर शहीद सरदार भगत सिंह ने लिखा है कि -‘‘आप
(अशफाक) श्री राम प्रसाद के दायें हाथ थे, मुसलमान होने के बावजूद
आपको कट्टर आर्य समाजी धर्म से हर दर्जे तक का प्रेम था। दोनों प्रेमी
एक बड़े काम के लिए अपने प्राण उत्सर्ग कर अमर हो गये।‘’
शहीदे आज़म अशफाक उल्ला खाँ ने देश की आजादी के लिए
अपने प्राणों की आहुति दी। उनका यह उत्सर्ग आने वाली पीढ़ियाँ सदैव
स्मरण करेंगी तथा उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व से हमेशा प्रेरणा पाती
रहेंगी।
अशफाक के शब्द आज भी स्मृति में है और गूँजते हैं -
‘‘कुछ आरजू नहीं है, है आरजू तो यह है,
रख दे कोई जरा - सी खाके वतन कफन में।‘’
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