अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतुम सबको गम उठाने के लिए इंतखाब किया और मुझे मन्सूरे वक्त
बनाने का चुन लिया। मगर तुमको गिरिए याकूब अता किया तो मुझको
सुन्नते यूसफी अदा करने के लिए पुकारा। अगर तुमको मातम कुनाँ
मिस्ल खानदाने नबवी बनाना चाहा, बना दिया और मुझे मुत्तबए हुसैन
शहीदेतेगेजफा के खिताब से नवाजा! उसकी शान निराली। उसकी अदा
अनोखी, हर जगह नए रंग में हर तरफ नए रूप में, जलवागर है जो कुछ
हुआ और जो होगा और हो रहा है उसकी मरजी से हो रहा है और
होगा। पस कौन है जो सरताबी करे। और कौन है जो उसके हुक्म से
बाहर जा सके। बस उसी पर नजर रखो और सब्र-करार हाथ से न जाने
दो। शुक्र करो उसकी अमानत उसकी तरफ जा रही है और सानआ अपने
मननूअ को बिगाड़ना चाहता है। फिर तुम कौन रोने वाली, तुम कौन
तड़पने वाली? उसकी चीज थी उसको अखतियार है। सब्र करो, सब्र करो
और बकीया जिन्दगी का बेशबहा वक्त मेरे लिए रोने में न सर्फ करो
बल्कि उस सफ़र की तैयारी में लगाओ जो एक दिन दरपेश है। अबावत में
मगफिरत है। गुनाहों में वक्त न गुजार दो क्योंकि यही काम आएगा।
गफलत छोड़ो और उसको पकड़ो। दुनिया फना होने वाली है और तुम्हारा
भी बुढ़ापा है। अच्छा मेरी खताएं माफ करो और मुझे अपने हकूक से
सुबुकदोश करो। तुमको खुदा की अमान में दिया। तुम्हें नेक बीवी और
साबिरा बीवी बनाए। आमीन!
भावजों और भाइयों! अलफराक बीनी व बीनकुम-तुम आपस में
मिल-जुलकर रहना और दुनिया व बदकिस्मत माँ की खिदमत में लगी
रहना और बकीया जिन्दगी को सकून से गुजरने का मौका देना। अगर
तुम लोग ऐसे ही जो आपस में शिकवा व शिकायत करते रहे और
शकररंजी तुम्हारे दरम्यान रही तो कुछ लुत्फ नहीं। शीरो शकर बनकर
रहना और जुदा न होना। मेरी तो यही ख्वाहिश है और मुझे माफी
देना। खुदा की मरजी यही थी।
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