अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 193, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहबूब से मिलते आयें। अगर वह आएं तो हमराह लेते आएँ और बिस्तर
बंद भी जरूर लाये ताकि सामान व बिस्तर वगैरह बाँध कर दे दूँ। बिस्तर
बंद भूलें नही : -
‘‘है अर्ज आज मादरे नाशाद के हुजूर
मायूस क्यों हैं आप अलम का है क्यों वफूर।’’¹
अशफाक ने अपनी माँ को भावुक ही नहीं, वैचारिक पत्र भी लिखा है,
उनके पत्रों में स्पष्ट दिखता है कि वे जुल्म के खिलाफ लड़ने और अपील
करने की बात करते हैं लेकिन अपनी जमीन और हौसला नहीं छोड़ते।
माँ को लिखे पत्र में ढेर सारे शेर और नज़्में लिखकर अशफाक ने अपनी
संवेदना से साक्षात्कार कराया है। उनका एक-एक शेर साहस और प्रेरणा
देता है : -
‘‘सख्ती सही नहीं ईक उठाई कड़ी नही
दुनिया में क्या किसी पे मुसीबत पड़ी नहीं।’’²
अशफाक आगे इसी क्रम में लिखते है- ‘इन अशआर को जो किसी
शायर ने लिखे हैं, पढ़िए और खुदा से मदद माँगिये। आप कभी भी यह
ख्याल न कीजिए कि आप नुकसान में है। यहाँ पर मुझे एक किस्सा याद
आ गया। इंग्लैण्ड के एक बड़े शख्स हिन्दुस्तान आये। वह अपनी बीबी
के हमराह आगरे गये। जब ताजमहल पहुँचे तो उनकी बीबी ने कहा कि
अगर कोई वायदा करे कि मेरे मरने के बाद ऐसी आलीशान इमारत जैसा
यह ताजमहल है, बनवाकर मुझे दफन करेगा तो मैं इसी वक्त अपने
गोली मारने को तैयार हूँ।
- अशफाक उल्ला खाँ और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 128-129
- अशफाक उल्ला खाँ और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ -130
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