अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवह मसखरापन कोर्ट में हुआ कि खुदा की पनाह। मुझे तो न
पहले उम्मीद थी न अब है, मगर भाई साहब और लल्लू भैया के कहने
के मुताबिक सफाई वगैरह पेश कर दी और चाराजोई की खैर! अब सुनिए,
आपको मालूम हो जाना चाहिए कि खैरात नबी ने साफ अलफाज में कह
दिया है कि इंतहाई सजा मिलेगी। मेरे लिए तो यह बड़े मजे की बात है।
मेरे लिए इससे ज्यादा फख्र की बात कौन-सी हो सकती है। मेरी माँ से
बढ़कर मेरे खानदान में कौन सी माँ हो सकती है जिसका बेटा जवाँमर्दी
और बहादुरी से, इस्तकामत व इस्तकलाता से रास्तबाज़ी के सास
मासूमियत का जामा पहने हुए, कुर्बानगाहे वतन पर कुरबान हो जाए।
मेरे सकून व इत्मीनान यू है कि मैं अपने को मासूम समझता हूँ और
आपके भी सब के लिए यह काफी है कि आपका मासूम लड़का एक ऐसे
मकसद की खातिर जान से जायेगा जो बड़ा ऊँचा और नेक व पाक है।
इस इजलामात जो मुझ पर लगाये गये हैं मैं कभी भी इसके लिए
तैयार नहीं हूँ। हाँ एक हिन्दुस्तानी होने की वजह से अगर यह तमाम
बातें है तो खैर-दुनियावी बादशाहतें खत्म हो जायेंगी। किब्रो-गरूर मिट्टी
में मिल जायेगा-शौकत और हशमत का कहीं पता भी न होगा मगर हाँ
खुदावंद कुद्दूस के दरबार में वाकियात असली रोशनी में होंगे और वह
हकीम हकीकी जिसने मूसा और फिरऔन का फैसला किया था मेरा भी
करेगा। चन्दरोज जिन्दगी पर खुश होने वाले इंसान जुल्मो तअद्दी करने
वाले सी०आई०डी० के लोग उस दिन मालूम करेंगे कि वे किसके सामने
जवाब-देह हैं। आप खुद पर शाकिर रहिये। सब कीजिए और मेरे लिए
दुआ फरमाइये और अगर उसको मुझे शहादत की इज्जत देना मकसूद है,
तो अजमो-इस्तकलाल जुरअत व हिम्मत भी अता करे और इम्तिहान के
दिन मुझे बहादुर बनाये। आप कभी अफसोस न करें कि मैंने ऐनुद्दीन
साहब और तसद्दुक
साहब के कहने पर अमल किया था। क्या वह इस बात की गारन्टी
कर सकते थे कि मैं न मरूँगा। नहीं, मौत व जिन्दगी खुदावन्दे करीम के
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