अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपड़ा। 1925 के एच०एस०आर०ए० के घोषणा पत्र में कहा गया कि संगठन
का उद्देश्य उन तमाम व्यवस्थाओं का उन्मूलन करना है, जिसके तहत
एक व्यक्ति दूसरे का शोषण करता था। क्रांतिकारियों ने रेल, परिवहन,
इस्पात और जहाज जैसे निर्माणकारी उद्योगों के राष्ट्रीयकरण का भी
प्रस्ताव रखा। बिस्मिल ने जेल से एक संदेश भेजा कि वे पिस्तौल व
रिवाल्वर रखने की इच्छा छोड़ दें। क्रांतिकारी षड़यंत्रों में हिस्सा न लें।
खुला आन्दोलन चलाएं। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता बनाए रखने की
अपील की। यही नहीं उन्होंने साम्यवाद में अपनी आस्था व्यक्त की। वे
यह भी कहते हैं कि प्रकृति की हर सम्पदा पर प्रत्येक इंसान का बराबर
का हक है।
काकोरी काण्ड के पश्चात् बंगाल में धीमी पड़ चुकी क्रांतिकारी
कार्यवाहियों में तेजी आ गयी। पुरुषों तक सीमित क्रांतिकारी आन्दोलन में
1925 आते-आते महिलाएं भी शामिल हो गयीं। प्रीतिलता वाडेदार, कल्पना
राव आदि अनेक महिलाएं प्रमुख रूप से भाग लेती थीं। स्पष्ट था कि
अंग्रेजी सरकार सर्तक हो गयी। 1925 के आसपास चटगांव विद्रोह के रूप
में एक महत्वपूर्ण घटना दृष्टिगत होती है। काकोरी काण्ड के बाद हमें
क्रांतिकारी संगठनों के विचारों में तेजी से हुए परिवर्तन भी स्पष्ट होते हैं।
पूर्व के विचारों में हिंसा का बाहुल्य था। हिंसा के द्वारा ही जनता में
अपनी पैठ बनाना उद्देश्य था। परन्तु काकोरी काण्ड में हुई फांसी से यह
प्रश्न आया कि इतना कैडर कहां से आयेगा कि इतने लोग घर-बार
छोड़कर जनता के बीच पूरे समय के लिए काम कर सकें। उनका मानना
था कि कुछ चमत्कारिक एवं बहादुरी के कार्यों द्वारा प्रचार होगा। आगे
चलकर एच०एस०आर०ए० ने भी युवकों से अनुरोध किया कि क्रांतिकारी
आतंकवाद का रास्ता छोड़ दें। ब्रिटिश सरकार की कूटनीतियों के कारण
क्रांतिकारी आन्दोलन का पराभव होता गया। तत्कालीन सरकार ने इन
क्रांतिकारियों को छोटे से दोष के लिए बड़े से बड़ा कड़ा दण्ड देकर समाज
में एक प्रकार का भय पैदा कर दिया, जिससे युवा वर्ग इन कार्यों से दूर रहें।
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