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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 172, कुल 297 में से

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इन सदस्यों ने चन्द्रशेखर आजाद को अध्यक्ष चुना और उनके नेतृत्व में
केन्द्रीय समिति (एच०आर०ए०) बनाई।¹
क्रांतिकारी युवाओं ने समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर हिंसा
का मार्ग धीरे-धीरे छोड़ने का मन बनाया। भगत सिंह और उनके
साथियों ने पहली बार क्रांतिकारियों के समक्ष क्रांतिकारी दर्शन रखा।
काकोरी काण्ड के बाद संगठन का उद्देश्य था कि जहां भी एक व्यक्ति
दूसरे का शोषण करता था, उसे व्यवस्था का उन्मूलन करना होगा। जेल
की कोठरी में अशफाक उल्ला खां ने लिखा कि - 'हिंसा के मार्ग को
छोड़कर आन्दोलन मूल धारा में आ जाए और हिन्दू-मुसलमान एकता
बनाये रखने का प्रयास करें। क्योंकि इन्हीं जातियों में अंग्रेज फूट डालने
की भरपूर कोशिश करते थे।' अशफाक को भी लालच देकर सरकार द्वारा
गवाह बनाने का प्रयास किया गया था।
काकोरी काण्ड भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में पहला ऐसा ठोस प्रयास
था कि जिसके प्रतिफल के रूप में हमें क्रांतिकारी गतिविधियों की
बारम्बारता दिखाई पड़ती है। इन क्रांतिकारी गतिविधियों में मुख्यतया
एच०एस०आर०ए० संगठन के माध्यम से अनेक प्रयास किये गये।
काकोरी काण्ड के पश्चात् अंग्रेजी सरकार की खिलाफत करने के
लिए भारी संख्या में युवा वर्ग सामने आया। क्रांतिकारी युवा व्यक्तिगत
आतंकवाद और हत्या की राजनीति छोड़कर संगठित क्रांतिकारी कार्यवाही
में विश्वास करने लगे थे। साइमन कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान
लाला लाजपतराय पर लाठीचार्ज और उसके बाद उनकी मौत ने युवा
क्रांतिकारियों को एक बार फिर व्यक्तिगत आतंकवाद और हत्या की राह
पकड़ने पर मजबूर कर दिया।
1.भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ -226
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