अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय-आठ
काकोरी काण्ड का प्रभाव
काकोरी षड़यंत्र, असहयोग आन्दोलन के बाद सब षड़यन्त्रों का
जनक है क्योंकि इसी षड़यंत्र के लोगों ने बिहार, पंजाब, मध्य प्रान्त,
बम्बई तक में अपनी शाखाएं स्थापित की थी।¹
काकोरी काण्ड में सरकारी खजाना रेल डकैती द्वारा लूटा गया था।
सरकार इस घटना से कुपित थी। घटना में शामिल क्रांतिकारी पकड़े गये
और फांसी, काला पानी, कठोर दण्ड की सजाएं हुई थी। चन्द्रशेखर
आजाद फरार ही थे। उत्तर भारत के क्रांतिकारियों के लिए काकोरी काण्ड
एक बड़ा आघात था, पर ऐसा नहीं था कि, जो क्रांतिकारी आन्दोलन के
लिए मौत साबित हों। इस घटना का प्रभाव इतना हुआ कि क्रांति हेतु
अन्य युवा भी तैयार हो गये। युवाओं में समाजवादी विचारधारा जो ऊर्जा
का काम कर रही थी, पूरी तरह प्रभावित थी। काकोरी काण्ड के
क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी के बाद दल छिन्न-भिन्न हो गया, इसे
संभालने का कार्य चन्द्रशेखर ने उठाया। साधन उपयुक्त न होने से कुछ
खास नहीं कर पाये। हां इतना अवश्य था कि 1926 में पंजाब में संगठन
जोर-शोर से बनने लगा।²
उ०प्र०, पंजाब, बिहार में संगठन था, किन्तु इसमें कोई आपसी
घनिष्ठ सहयोग नहीं था। 8 दिसम्बर, 1928 को समस्त भारत के प्रमुख
क्रांतिकारियों की सभा हुई। इस सभा में जय देव, शिव वर्मा, विजय
कुमार सिंह, सुखदेव, ब्रहमदत्त, सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय, भगत सिंह, भगवती चरण
वोहरा, चन्द्रशेखर आजाद, फणीन्द्रनाथ घोष प्रमुख थे।
1.भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ -217
2.भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ -225
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